संसाधन किसे कहते हैं, परिभाषा, प्रकार, महत्व – सम्पूर्ण अध्ययन 2024

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मनुष्य जीवन आज इतना विकास कर पाया है तो वह केवल संसाधनों (Resources) के बदौलत. संसाधनों के बिना विकास की कल्पना नामुमकिन है.

जबसे हम पैदा हुए हैं. बड़े होते हैं. इस दौरान लगातार संसाधनों का उपयोग करते रहते हैं. और यही पक्रिया अंत तक चलती रहती है. हमारे लिए संसाधनों की जानकारी हर दृष्टि से महत्वपूर्ण है.

क्योंकि इसकी सहीं जानकारी ही हमें संसाधनों के प्रति जागरूक बनाएगी, संसाधनों के सहीं उपयोग और बचाव के लिए इसका ज्ञान होना बहुत ही आवश्यक है.

आज के इस लेख – संसाधन क्या है? संसाधन किसे कहते हैं? (sansadhan kise kahate hain) में हम संसाधनों के विषय में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगें.

संसाधन क्या है – Sansadhan kise kahate hain

Sansadhan kise kahate hain

संसाधन – हमारे पर्यावरण में चारों तरफ नजर आने वाली वस्तुएं जो हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक है और जिनसे हमारी जरूरतें पूरी होती है संसाधन कहलाती है.

even.. मनुष्य भी एक संसाधन है. जिसके कारण लगातार विकास का सिलसिला चलता रहता है (परन्तु मनुष्य के संसाधन होने पर मतभेद है. कुछ विद्वानों द्वारा मनुष्य को संसाधन माना जाता है. और कुछ के द्वारा नहीं)

एक line में… किसी वस्तु की उपयोगिता उसे संसाधन बनाती है. संसाधन के उदाहरण हैं – जल, हवा, पंखा, मिट्टी, पौधे इत्यादि.

संसाधन की परिभाषा – Definition of Resource

संसाधन की परिभाषा के विषय में अलग-अलग विद्वानों का भिन्न-भिन्न परिभाषाएं हैं. जो इस तरह है –

जिम्मरमैन के अनुसार संसाधन की परिभाषा : “संसाधन पर्यावरण की वे विशेषताएं हैं जो मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति में सक्षम मानी जाती हैं, जैसे ही उन्हे मानव की आवश्यकताओं और क्षमताओं द्वारा उपयोगिता प्रदान की जाती हैं.”

जेम्स फिशर के अनुसार संसाधन की परिभाषा : ” संसाधन वह कोई भी वस्तु हैं जो मानवीय आवश्यकतों और इच्छाओं की पूर्ति करती हैं.”

स्मिथ एवं फिलिप्स के अनुसार : “भौतिक रूप से संसाधन वातावरण की वे प्रक्रियायें हैं जो मानव के उपयोग में आती हैं”

संसाधन के प्रकार

संसाधन के 2 प्रकार होते हैं –

  • प्राकृतिक संसाधन
  • मानवनिर्मित संसाधन

A . प्राकृतिक संसाधन क्या है

प्राकृतिक संसाधन वह संसाधन है जो पर्यावरण में प्राकृतिक रूप से निर्मित है. इस संसाधन के निर्माण में मनुष्यों का कोई हाँथ नहीं है. प्राकृतिक संसाधन के उदाहरण है – सूर्य प्रकाश, भूमिगत जल, फल, सब्जियां, हवा इत्यादि.

प्राकृतिक संसाधन के प्रकार

प्राकृतिक संसाधन 2 प्रकार के हैं

  1. नवीकरणीय संसाधन
  2. अनवीकरणीय संसाधन
1. नवीकरणीय संसाधन क्या है –
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नवीकरणीय संसाधन वह संसाधन है जिसका उपयोग बार-बार किया जा सकता है. अर्थात यह संसाधन कभी समाप्त नहीं होता इसे फिर से प्राप्त किया जा सकता है.

इसका यह मतलब कदापि नहीं है कि नवीकरणीय संसाधन का लगातार दोहन किया जाये, लगातार दोहन से यह नवीनीकरणीय संसाधन नहीं रह जाता, माना की जल कभी समाप्त नहीं हो सकता, परन्तु इसके व्यर्थ दोहन और ecosystem में होने वाले बदलाव से जलसंकट जैसी समस्याएं अवश्य देखनी पड़ सकती है. कई क्षेत्रों में जल समस्या निरंतर व्याप्त होती जा रही है.

नवीकरणीय संसाधन के उदाहरण है – सूर्य, जल, पवन ऊर्जा, (सहीं मायनों में इन्हे नवीकरणीय संसाधन नहीं माना जाता बल्कि यह अक्षय ऊर्जा कहलाता है. जो प्रदूषण रहित होता है.)

2. अनवीकरणीय संसाधन क्या है

अनवीकरणीय संसाधन वे संसाधन है, जिनका भण्डारण सिमित है या इन्हे दोबारा प्राप्त करने में लाखों साल लग सकते हैं. लगातार उपयोग से यह संसाधन समाप्त हो सकता है.

अनवीकरणीय संसाधन के उदाहरण है – कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैंस इत्यादि, अगर यह संसाधन समाप्त हो गए. तो इन्हे दोबारा प्राप्त करने में करोणों साल लग जायेंगे

B. मानव निर्मित संसाधन –

मानव निर्मित संसाधन का तात्पर्य है. प्राकृतिक संसाधन का उपयोग करके नया देना या कुछ नया निर्मित करता है. जैसे कि लौह अयस्क उस समय तक संसाधन नहीं था जब तक लोगों ने उससे लोहा बनाना नहीं सीखा था.

मानवनिर्मित संसाधन के उदाहरण – कुर्सी-टेबल, वाहन, सड़क, प्रौद्योगिकी, रेल्वे लाइन इत्यादि.

अगर मानव ना होता तो विकास के जिस स्तर पर आज हम हैं उसे हम प्राप्त नहीं कर पाते क्योंकि मानव ने ही प्राकृतिक उपहारों का उपयोग करके मानवता का विकास किया है. इससे पता चलता है कि मानव भी एक संसाधन है.

उत्पत्ति के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण

उत्पत्ति के आधार पर संसधान को 2 भागों में वर्गीकृत किया गया है –

  • जैव संसाधन
  • अजैव संसाधन

जैव संसाधन क्या है?

जीन संसाधनों की प्राप्ति जैवमण्डल से होती है. उसे जैव संसाधन कहते हैं. उदाहरण – मतस्य, पशुधन, वनस्पत्ति, प्राणी, गाय-भैंस इत्यादि.

अजैव संसाधन क्या है?

निर्जीव वस्तुओं से प्राप्त संसाधनों को अजैव संसाधन कहते हैं. जैसे – चट्टानें, धातुएं इत्यादि.

स्वामित्व के आधार पर संसाधनों के विभिन्न प्रकार – Resources by ownership

स्वामित्व के आधार पर संसाधन को 4 भागों में बाटा गया है –

  • व्यक्तिगत संसाधन
  • सामुदायिक संसाधन
  • राष्ट्रीय संसाधन
  • अंतर्राष्ट्रीय संसाधन

व्यक्तिगत संसाधन क्या है?

किसी व्यक्ति का निजी अधिकार वाला संसाधन व्यक्तिगत संसाधन कहलाता है. जिसके बदले में वह सरकार को कर चुकाता है. जैसे – घर, किसान का जमींन, कुवां, बाग़-बगीचा इत्यादि

सामुदायिक संसाधन क्या है?

सामुदायिक संसाधन किसी एक व्यक्ति का निजी ना होकर पुरे समुदाय के लिए होता है. उसे सामुदायिक संसाधन कहते हैं. जैसे – मंदिर, मस्जिद, श्मशान, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन इत्यादि.

राष्ट्रीय संसाधन क्या है?

जिस संसाधन पर पुरे राष्ट्र या देश का अधिकार होता है उसे राष्ट्रीय संसाधन कहते हैं जैसे – सड़क, रेल, नहर, सरकारी जमीन इत्यादि.

अंतर्राष्ट्रीय संसाधन क्याहै ?

ऐसे संसाधनों का नियंत्रण अंतर्राष्ट्रीय संस्था करती है. किसी राष्ट्र के समुद्रीय तट रेखा से 200KM की दुरी को छोड़कर खुला महासागरीय संसाधन अंतर्राष्ट्रीय संसाधन कहलाता है.

विकास के आधार पर संसाधनों के प्रकार – Types of Resources on the Basis of Development

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विकास के आधार पर संसाधनों के 4 प्रकार हैं –

  • संभावी संसाधन
  • विकसित संसाधन
  • भंडार संसाधन
  • संचित कोष संसाधन

संभावी संसाधन क्या है?

इस प्रकार के संसाधन जो किसी जगह पर मौजूद तो हैं परन्तु तकनिकी या ज्ञान के अभाव के कारण अभी तक उपयोग में नहीं लाये गए हैं. लेकिन भविष्य में उनकी विकास और उपयोग की सम्भावनाये हैं.

संभावी संसाधन कहलाते हैं. उदाहरण – समुद्र का पानी को पिने में उपयोग, हिमालय क्षेत्र में खनिज, गुजरात व राजस्थान में पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा इत्यादि.

विकसित संसाधन क्या है?

वह संसाधन जिसके बारे में सारी जानकारियां हमें पता है. जैसे कितना चलेगा, कब तक चलेगा, कितना खर्च आएगा, कैसा है और कहाँ पर है. इत्यादि की जानकारियां हमें पता है उसे विकसित संसाधन कहते हैं.

भण्डार संसाधन क्या है?

इस प्रकार के संसाधन जिसका वर्तमान में उपयोग तो हो ही रहा है साथ ही भविष्य के लिए भी इसे सुरक्षित रखा जा रहा है. भण्डार संसाधन कहलाता है. जैसे – जल, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन इत्यादि.

संचित कोष संसाधन क्या है?

ऐसी संसाधन जिसे उपलब्ध तकनीक के माध्यम से उपयोग में लाया जा सकता है परन्तु इसे भविष्य मानकर अभी उपयोग नहीं किया जा रहा है. उसे संचित कोष संसाधन कहते हैं. जैसे – नदी का जल इत्यादि.

वितरणों के आधार पर संसाधन के प्रकार – Resource types based on distributions

  • सर्वसुलभ संसाधन
  • सामान्य सुलभ संसाधन
  • विरल संसाधन
  • एकल या अद्वितीय संसाधन

सर्वसुलभ संसाधन क्या है?

जो संसाधन सभी जगह पर सामान रूप से पाए जाते हैं. उन्हें सर्वसुलभ संसाधन कहते हैं. जैसे – हवा, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन इत्यादि.

सामान्य सुलभ संसाधन क्या है?

अधिकांश जगहों पर पाए जाने वाले संसाधन सामान्य सुलभ संसाधन कहलाते हैं. उदाहरण – कृषि योग्य भूमि, पिने योग्य पानी, मिट्टी इत्यादि.

विरल संसाधन क्या है?

कुछ सीमित जगहों (बहुत कम) पर ही पाए जाने वाले संसाधन को विरल संसाधन कहते हैं जैसे – सोना, चांदी, हीरा, कोयला, टिन, यूरेनियम, पेट्रोलियम इत्यादि.

एकल संसाधन क्या है?

यह संसाधन पृथ्वी पर केवल एक या दो जगह ही पाया जाता है. एकल संसाधन कहलाता है. जैसे ग्रीनलैंड पर पाया जाने वाला क्रोमोलाइट.

संसाधनों का संरक्षण – conservation of resources

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मान लीजिये जिन संसाधनों का उपयोग करने हम आराम से जीवन यापन कर रहे हैं जैसे – जल, भोजन, पेट्रोल, कोयला, बिजली इत्यादि ये अचानक ही समाप्त हो जाएँ तो.

निश्चित रूप से जीवन-यापन करने में बड़ी कठिनाइयां आएगीं, इसलिए यह जरुरी है कि हमारे पास उपस्थित संसाधनों का हम सोंच समझकर उपयोग करें.

संसाधनों का सावधानी से उपयोग करना तथा उन्हें नवीकरण के लिए समय देना संसाधन संरक्षण कहलाता है. संसाधन संरक्षण के लिए सबसे जरुरी बात यह है कि हम पुनः चक्रण और पुनः इस्तेमाल का उपयोग करें, साथ ही संसाधनों का उपयोग उतना ही करें जितना की आवश्यक है.

हमारे द्वारा उठाये गए छोटे-छोटे कदम भी संसाधन संरक्षण के बहुत महत्वपूर्ण हैं.

संसाधन का नियोजन क्या है – what is resource planning

संसाधन नियोजन का तात्पर्य निश्चित रुपरेखा तैयार करने से है. अर्थात संसाधनों का बिना दुरुपयोग किये इसका पूर्ण उपयोग करना संसाधन का नियोजन कहलाता है.

आप जानते हैं कि संसाधन हमारे लिए कितना जरुरी है. यह हमारे जीवन को सरल और सुखद बनाती है. परन्तु आप यह भी जान गए हैं कि पृथ्वी पर अनेक साधन सीमित मात्रा में है. ऐसे में इसका अत्यधिक प्रयोग संसाधनों के लिए खतरा है. जो समाप्त हो जाने पर मानव के लिए भी दुखद है.

संसाधन का नियोजन क्यों आवश्यक है?

भारत जलवायु विविधता वाला देश है. यहाँ किसी क्षेत्र में संसाधन पूरी तरह से कम है तो कही अधिक मात्रा में भी है. यहाँ तक हर जगह पर अलग अलग तरह के संसाधन पाए जाते हैं ऐसे में सभी क्षेत्रों में संसाधन की समरूपता बनाये रखने के लिए संसाधन नियोजन आवश्यक है.

FAQ : Sansadhan kise kahate hain से संबंधित प्रश्न उत्तर

प्रश्न : संसाधन किसे कहते हैं कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर : मानव उपयोग में लाई जाने वाली सभी वस्तुएं संसाधन कहलाती है. संसाधन मुख्यतः दो प्रकार के हैं – जैविक संसाधन और अजैविक संसाधन.

प्रश्न : प्राकृतिक संसाधन के कितने प्रकार है?

उत्तर : प्राकृतिक संसाधन 2 प्रकार के होते हैं – नवीकरणीय संसाधन और अनवीकरणीय संसाधन.

प्रश्न : संसाधन से आप क्या समझते हैं उदाहरण दो?

उत्तर : वह वस्तुएं जो मानव जीवन को सरल बनाती है संसाधन कहलाती है. उदाहरण – लकड़ी, कोयला, सोना, चांदी इत्यादि.

प्रश्न : प्राकृतिक साधन कौन कौन से हैं?

उत्तर : पर्यावरण से प्राप्त संसाधन प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं प्राकृतिक संसाधन के उदाहरण है – वनस्पति, झील, जल, नदी, पहाड़, पर्वत, पठार, जंगल, फल, पशुधन, सब्जियां इत्यादि.

प्रश्न : प्राकृतिक संसाधनों का क्या महत्व है?

उत्तर : प्राकृतिक संसाधनों का महत्व इतना है कि अगर यह ना हो तो मानव जीवन खतरे में पड़ जायेगा. हम अपने जन्म से ही प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े हुए हैं और इन्ही का उपयोग करके जीवन यापन करते हैं. पृथ्वी के सभी जीव-जंतुओं और प्राणियों के लिए संसाधन आवश्यक है. इसके बिना जीवन संभव नहीं है.

निष्कर्ष

संसाधन प्रकृति का अनमोल तोहफा है इसे बर्बाद करना हमारा हक़ नहीं है. इसे हमें आने वाली भावी पीढ़ी को सुरक्षित रूप से सौपना है. संसाधन के संरक्षण में रोजाना एक कदम अवश्य उठायें – पानी व्यर्थ ना बहाएं, बिजली व्यर्थ ना जलाएं। छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव लाते हैं.

आखिर में

आशा है आपको हमारा यह लेख – संसाधन क्या है (Sansadhan kise kahate hain) पसंद आया हो. इस तरह के ज्ञानवर्धक लेख को अपने दोस्तों के साथ अवश्य shear करें – आप चाहे तो हमारा टेलीग्राम और gmail ज्वाइन कर सकते हैं. लिंक नीचे दिया हुआ है.

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