सैयद अब्दुल रहीम जी का जीवन परिचय | syed abdul rahim biography in hindi.

सैयद अब्दुल रहीम एक ऐसी सख्सियत जिन्होंने कैंसर जैसी बीमारी में जूझते हुए भी भारत को सन 1962 में (GOLD MEDAL) सोने का पदक दिलाया था। इस लेख में भारतीय टीम के कोच रहे सैयद अब्दुल रहीम जी का जीवन परिचय (Syed abdul rhim ka jivan parichay) के बारे में जानेगें 

सैयद अब्दुल रहीम जी का जीवन परिचय

  • सैयद अब्दुल रहीम जी का जन्म : 17 अगस्त 1909 में हैदराबाद, भारत में हुआ 
  • सैयद अब्दुल रहीम की बायोग्राफी फिल्म : “मैदान” अजय देवगन 
  • रहीम जी का अन्य नाम : आर्किटेक्ट आफ मॉडर्न इंडियन फुटबॉल 
  • व्यवसाय : इंडियन फुटबाल टीम के कोच, शिक्षक भी थे 
  • इनके पिता का नाम : अब्दुल कादिर गिलानी 
  • शिक्षा : प्रारंभिक राजकीय विद्यालय और उच्च शिक्षा उस्मानिया विश्वविद्यालय से 
  • बच्चे : सैयद शाहिद हकीम (ओलम्पिक फूटबाल और फीफा अधिकारी)
  • सैयद अब्दुल रहीम की मृत्यु : 11 जून 1963 (53 उम्र) भारत में 
  • मृत्यु का कारण : कैंसर रोग 
सैयद अब्दुल रहीम जी का जन्म जैसा की ऊपर दिया हुआ है 17 अगस्त 1909 को हैदराबाद भारत में हुआ था वे पेशे से एक शिक्षक थे, रहीम जी के अंदर मोटिवेट करने की अतभुत कला थी। विकट परिस्थिति में भी वे अपने motivation से जोश भर देते थे। 

सैयद अब्दुल रहीम जी की पढाई-लिखाई (Syed Abdul Rahim ji’s Studies)

सैयद जी की सुरुवाती पढाई उनके ही शहर हैदराबाद के राजकीय विश्वविद्यालय में हुई बाद में वे उच्च शिक्षा के लिए उस्मानिया विश्विद्यालय चले गए। 
रहीम जी स्कूल के समय से ही पढाई के साथ-साथ खेल-कूद में भी विशेष रूचि रखते थे। वे पढाई और खेल दोनों में एक्टिव थे और हमेसा खेल में हिस्सा लिया करते थे। 

सैयद अब्दुल रहीम जी का करियर (Syed Abdul Rahim ji’s career)

रहीम जी बहुत छोटी उम्र में ही फूटबाल कौशल के धनी थे। सन 1920 में रहीम जी फूटबाल खेलने के लिए हैदराबाद गए, जहां अपनी बेहतरीन फूटबाल कौशल से उन्होंने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा, फिर वे उस्मानिया विश्वविद्यालय की टीम की तरफ से फूटबाल खेलने लगे। 
रहीम जी ने अपना कॅरियर एक शिक्षक के रूप में शुरू किया परन्तु उनका फूलबाल के प्रति प्रेम उन्हें हमेसा खेलने के लिए प्रेरणा दिया करते थे। 
कमर-क्लब जो हैदराबाद स्थानीय लीग की best team थी उसमे 1920 से 1940 के बीच सैयद अब्दुल रहीम का नाम एक महान खिलाडी के रूप में लिया जाता था। बाद में जब हैदराबाद फूटबाल एसोसिएट बना तो 1942 में रहीम जी वहां के सचिव के रूप में पदस्थ किये गए। 
बात करें रहीम जी की व्यक्तित्व की तो वे बहुत ही प्रतिभावान और फूटबाल कौशल में निपुण कोच थे। 

सैयद अब्दुल रहीम की प्रतिभा में शामिल थी 

  • दूरदर्शिता 
  • सहनशक्ति 
  • खिलाडियों का चयन 
  • खेल के प्रति उनका सोंच और जूनून 
  • गजब की सकारात्मक भाव और पॉजिटिविटी 
  • कठिन नियम/सख्त अनुसासन 
  • जोशीला और प्रेरक भाषण 
1943 में रहीम जी को हैदराबाद सिटी पुलिस का कोच नियुक्त किया गया यहाँ उन्होंने फूटबाल खेलने के अलग-अलग तरीकों और कलाओं को सभी को सिखाना प्रारम्भ कर दिया उन्होंने फूटबाल के बुनियादी ढांचे को सुधारने में अपना भरपूर योगदान दिया तथा फूटबाल की और भी अधिक तकनिकी ढंग को खिलाडियों के सामने रखा। 
हैदराबाद सिटी पुलिस के खिलाडियों के लिए वे टूर्नामेंट कराया करते थे ताकि खिलाडियों में गतिशीलता, खेलने का कौशल, खेल के प्रति नजरिए, और सहनशक्ति इत्यादि का विकास हो। 
 

सैयद अब्दुल रहीम जी के ऐतिहासिक कारनामे (Historical exploits of Syed Abdul Rahim ji)

1. 1943 बेंगलुरु में हैदराबाद पुलिस टीम ने रॉयल वायु सेना को फाइनल में हराकर ऐतिहासिक जीत हांसिल की और गोल्ड अपने नाम कर लिया। 
 
2. 1950 डुरंड कप में मोहन बागान को हराकर बंगाल को चुनौती दिया। 
 
3. अपने बेहतरीन कोच कला के बदौलत हैदराबाद पुलिस टीम को लगातार 5 बार रोवर्स कप दिलाया जो आज भी एक रिकार्ड बना हुआ है। 
 
4. सन 1950 में हैदराबाद पुलिस टीम के प्रबंधन के साथ साथ भारतीय राट्रीय फूटबाल टीम के कोच भी बनाये गए। 
 
5. भारतीय कोच के रूप में उनका पहला टूर्नामेंट भारत में वर्ष 1951 में हुआ और उम्मीद स्वरुप उन्होंने ईरान को हराकर फाइनल में जीत हांसिल किया। 
 

जब बिना जूतों के फूटबाल खेलने की वजह से हारी भारतीय टीम 

1952 में भारतीय टीम ओलम्पिक खेलने के लिए फिनलैंड गयी, यहाँ भारतीय टीम को युगोस्लाविया से भारी हार का सामना करना पड़ा यह हार का आंकड़ा था 1-10 और इस हार का मुख्य कारण था भारतीय टीम का बिना जूतों का खेलना। बाद में टीम भारत वापस आयी तब उन्हें जूते पहनकर खेलने की घोसणा की गयी। साथ ही अपमान जनक हार के कारण सैयद अब्दुल रहीम जी को अपने हिसाब से टीम चुनने की अनुमति को भी रद्द कर दिया गया। 
 
फिर स्टेट की टीम को डब्ल्यू-फार्मेशन में बदल दिया गया, शुरू-शुरू में तो इस टीम का  भरपूर मजाक उड़ाया गया पर 1952 में बेहतरीन प्रदर्शन दिखाते हुए अपने कट्टर दुश्मन पाकिस्तान को हराकर अपने बेहतरीन कला को प्रदर्शित किया। 
India में ही खेले गए 1950, 1957 और 1959 के मैचों में हैदराबाद पुलिस टीम ने अपने बेहतर प्रदर्शन से 12 मेडल अपने नाम किया। 

सैयद अब्दुल रहीम ने भारत गोल्ड दिलाया तब जब वह कैंसर से जूझ रहे थे 

सन 1962 का वह दिन जब सैयद अब्दुल रहीम कैंसर जैसी भयानक बीमारी से पीड़ित चल रहे थे और भारतीय टीम का फ़ाइनल मैच साऊथ कोरिया की टीम से था। साऊथ कोरिया की टीम कोई कमजोर टीम नहीं थी और इधर भारतीय टीम के दो खिलाडी घायल थे व गोलकीपर का तबियत खराब था, बावजूद इसके भारतीय टीम ने साऊथ कोरिया की टीम को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया 
यह सैयद अब्दुल रहीम जी की बदौलत संभव हो पाया क्योंकि जिस टीम का कोच ही कैंसर जैसी बीमारी से ना घबराते हुए खेल के लिए अपना जी जान देदे उस टीम के खिलाडी भला छोटी मोटी चोटों से क्यों घबराये। 
 

सैयद अब्दुल रहीम जी का अंतिम समय (Syed Abdul Rahim ji’s last time)

सन 1962 में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने के एक साल बाद सन 1963 में कैंसर से लड़ते हुए सैयद अब्दुल रहीम जी का मृत्यु हो गया। 
 

सैयद अब्दुल रहीम बॉयोपिक मूवी (Syed Abdul Rahim Biopic in hindi)

सैयद अब्दुल रहीम जी की जीवन पर आधारित उनकी बायोपिक मूवी बन रही है जिसमे रहीम जी भूमिका दमदार एक्टर अजय देवगन निभाएंगे, इस फिल्म का नाम मैदान तय किया गया है। 
 

अंतिम शब्द 

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