रायगढ़ के सत्यनारायण बाबा जीवन परिचय | तपस्या करते हो गए है 22 वर्ष से अधिक

सत्यनारायण बाबा का जीवन परिचय
सत्यनारायण बाबा का जीवन परिचय

रायगढ़ के सत्यनारायण बाबा : दुनिया में आश्चर्यजनक कारनामें होते ही रहते हैं, ऐसा ही एक कारनामा छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हुआ. जिसके बारे सुनकर, उसपर विश्वास करना थोड़ा मुश्किल सा हो जाएगा. परन्तु यह बात 100% सत्य है.

रायगढ़ के सत्य नारायण बाबा (हलधर) जिन्होंने 14 वर्ष की बाल्याअवस्था में अपना घर-द्वारा छोड़ दिया से घोर तपस्या के लिए चले गए आज के time पे उन्हें एक ही जगह पर इस तरह बैठे हुए 22 वर्ष से अधिक का समय हो गया हैं.

इस लेख के माध्यम से हम रायगढ़ वाले सत्यनारायण बाबा के जीवन परिचय के बारे में जानेंगे –

सत्यनारायण बाबा का जीवन परिचय – Biography of Satyanarayan Baba in hindi

नामसत्यनारायण बाबा
बचपन का नामहलधर
जन्म12 जुलाई 1984 
जन्म स्थान स्थानडूमरपाली, देवरी (रायगढ़) छतीसगढ़ 
तपस्या16 फरवरी 1984 से अभी तक 
बाबा सत्यनारायण के पिताजीश्री दयानिधि साहू 
बाबा के माताजीश्री मति हंसमति साहू 
सत्यनारायण बाबा का जीवन परिचय

हलधर (सत्यनारायण बाबा) का जन्म 12 जुलाई 1984 को छत्तीसगढ़ राज्य के रायगढ़ जिले के डूमरपाली ग्राम में एक मध्य्मवर्गीय कृषक परिवार में हुआ, उनका बचपन का नाम हलधर था, हलधर के पिताजी उन्हें सत्यम कहकर पुकारते थे.

हलधर बचपन से ही धार्मिक प्रवृति के थे, एक बार गांव में ही तालाब के पास स्थित एक मंदिर में हलधर 7 दिनों तक बिना कुछ खाये पिए लगातार तप करते रहे, तभी से ही उन्हें शिव भक्ति में विशेष रूचि दिखाई देने लगी थी, स्कूल में पढ़ते समय वो कही और खोये रहते थे। 

हलधर जब 14 साल के थे तब, अपना बस्ता लेकर स्कूल के लिए निकले, परन्तु वे स्कूल नहीं गए वे अपने गांव डूमरपाली से 19 किलो मीटर की दुरी पैदल चलकर कोसमनारा (रायगढ़) पहुंचे, और वही कोसमनारा के खार में कुछ पत्थरो को इकठ्ठा कर शिवलिंग बनाया फिर अपना जीभ काट कर शिवलिंग पर समर्पित कर तपस्या के लिए बैठ गए।   

उनकी माँ उन्हें जगह-जगह खोजने ढूंढने लगी, और ढूंढते-ढूंढते कोसमनारा पहुंची, उनकी माँ ने उन्हें घर ले जाने का बहुत प्रयाश किया, बहुत कोसिसो के बाद भी हलधर वहा से नहीं उठे, और आज तक गर्मी, बरसात, ठंढी में एक जगह बैठकर लगातार तपस्या करते रहे, धीरे-धीरे दीन साल बीतते गए औ