उत्पादकता को प्रभावित करने वाले कारक या घटक | Factors Affecting Productivity in hindi

उत्पादकता को प्रभावित करने वाले कारक : हमारे अन्य लेख में हमने उत्पादकता क्या है तथा उत्पादकता के क्या-क्या लाभ है को विस्तृत रूप से वर्णित किया है.

इस लेख के माध्यम से उत्पादकता को प्रभावित करने वाले सभी घटकों के विषय में चर्चा करेंगें –

मालूम हो कि – उत्पादकता ऐसी प्रक्रिया है. जिसका प्राथमिक स्तर पर यह सुनिश्चय नहीं किया जा सकता की इसमें सफलता प्राप्त होगी या असफलता. उत्पादकता के होने वाला लाभ भी किसी एक कारण से नहीं अपितु अन्य अनेक कारणों से मिश्रित होता है.

Productivity affecting factors in hindi

—–***—–

जिस प्रकार उत्पादकता में होने वाले लाभ के पीछे एक नहीं बल्कि अनेक कारक मौजूद होते हैं ठीक उसी प्रकार उत्पादकता को प्रभावित करने वाले भी भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं. उत्पादकता प्रभावक कारक निम्न हैं –

1. तकनिकी संबंधित कौशल – Technological skills in hindi

उत्पादकता का यह कारक अनेक अनेक तत्वों जैसे –

  • मशीनीकरण
  • तकनिकी ज्ञान
  • कच्ची सामग्री
  • कार्य विधियां
  • अभिन्यास
  • ले आउट

इत्यादि से प्रभावित होता है. अनुसंधानों के परिणाम इसके सूचक औद्योगिक संयंत्रों में उत्पादकता को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं.

एक अर्थशास्त्री का मनना है कि औद्योगिक उत्पादकता अपने लिए महत्व के वस्तुतः नवीन विचारों तकनीकों अविष्कारों और आधुनिकतम विधि स्त्रोतों से प्राप्त होता है.

2. पर्यावरण – Environment

Environment in hindi

पर्यावरण के प्रभावक कारक से तात्पर्य भौतिक, भौगोलिक, जलवायु इत्यादि का उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव से है. यह उत्पादकता को सकारात्मक व नकारात्मक दोनों रूप से प्रभावित करती है.

प्रायः उष्ण जलवायु में कार्मिकों की उत्पादकता घट जाती है. जबकि शरद जलवायु में उत्पादकता बढ़ जाती है. इसके अलावा शहरीय व ग्रामीण पर्यावरण इत्यादि का अपना अलग प्रभाव पड़ता है.

इसलिए यदि – प्राकृतिक साधनों की सुलभता, आवश्यकता के अनुरूप भौगोलिक संरचना व जलवायु अनुकूलन विकास की दृष्टि से उपयुक्त हो तो औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि में कोई शक ही ना रहे. क्योंकि यह काफी हद तक वातावरणीय अनुकूलन पर निर्भर है.

3. प्रेरणा, मोटिवेशन – Motivation

motivational training in hindi

यह एक मनोवैज्ञानिक कारक है. जो अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ने के लिए प्रेरित करता है. मोटिवेशन हमेशा से ही नेतृत्व व प्रबंधन तंत्र के लिए समस्या रही है.

प्रेरणा से भरा कार्मिक कार्य के प्रति समर्पित होता है. वह अपनी जिम्मेदारियों को भली-भाति जानता है तथा बेहतर से बेहतर उत्पादन के दिशा में कार्य करता है.

परन्तु ठीक इसके विपरीत, अप्रेरक कार्मिक कार्य पर विशेष रूचि नहीं लेता तथा गुणवत्ता व उत्पादकता में सुधार के लिए कोई खास कदम नहीं उठाता.

यह तय है कि कार्मिक अपने कार्य और उत्पादकता में अपना 100% नहीं देता इसके अनेक कारण हो सकते हैं. नियोक्ता की जिम्मेदारी है कि श्रमिकों के अप्रेरणा के कारणों का पता लगाए तथा इसका उचित उपाय निकाले. जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके.

4. प्रबंधन – Management

Management in hindi

उत्पादकता संबंधित सभी कार्यों में जो मुख्य भूमिका होता है वह प्रबंधन का होता है. प्रबंधन ही है जो औद्योगिक जगत में नेतृत्व प्रदान कर प्रतिश्पर्धी माहौल में उसका उपयुक्त स्थान दिला पाने में सहायक होता है.

गौर कीजियेगा तो पाइयेगा कि औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि या सुधार करने का श्रेय उन दूरदर्शी साहसी एवं कुशल प्रबंधकों को ही जाता है जो उन्नत एवं बहुपयोगी नीतियों का निर्माण कर उत्पादन इकाई का प्रतिश्पर्धी माहौल में स्थान सुनिश्चित करने में सहायक होते है.

इस वर्ग में अपूर्व क्षमता त्वरित निर्णय क्षमता व जोखिम उठाने की क्षमता के साथ-साथ आत्मविश्वास भी भरपूर होता है. इसके अतरिक्त इस वर्ग में कार्मिकों के समन्वय बनाने की क्षमता व कौशल एवं समस्याओं से निपटने का दृष्टिकोण भी होता है.

यह सब उत्पादकता को बढ़ाने में सहायक हैं एक अर्थशास्त्री के दृष्टिकोण के अनुसार – उद्यम में वास्तविक शक्ति मानव-शक्ति, शारीरिक श्रम, पदार्थ तथा पूंजीगत उपकरण है. परन्तु उत्पादन क्षमता प्रभावपूर्ण नियोजन एवं नियंत्रण अर्थात प्रबंधन कौशल पर ही निर्भर करती है.

5. कार्य संबंधित नीतियों से उत्पादकता पर प्रभाव

कार्य संबंधित नीतियों जैसे – शुल्क, करारोपण तथा प्रशासनिक नीतियां आदि का परोक्ष तथा बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है. शासन नीतियों तथा करों में छूट प्रदत कर औद्योगिक उत्पादन को परोक्ष रूप से प्रोत्साहित करता है.

यध्यपि कार्यिकी सहायकों के माध्यम से उत्पादकता को प्रोत्साहन नीतिगत तरीके से ही प्रदत किया जाता है. परन्तु वे उत्पादन इकाई को स्थापित करने में मदद कर देते हैं.

इस कारक के अंतर्गत श्रमिक नियोजन के परस्पर संबंध पूंजी नियमन तकनिकी विकास अनुसंधान एवं सर्वेक्षण जैसे कार्यिकी सहायकों से संबंधित पहलुओं को नियंत्रित किया जाता है.

6. मशीनीकरण एवं स्वचालन – Mechanization & Automation

productivity

स्वचालन व मशीनीकरण का तात्पर्य है – वर्तमान समय में सभी कार्य मानवों द्वारा कम और मशीनों के भरोसे अत्यधिक संचालित है. वर्तमान में कृषि तथा उद्यम संबंधित कार्य पूरी तरह मशीनों पर निर्भर है.

70% क्षेत्र रोजगार एवं श्रम सेवा का क्षेत्र था परन्तु इस क्षेत्र में भी स्वचालन और मशीनीकरण का कब्ज़ा है. आम लोगों की घटती क्रय शक्ति इस बात को स्पष्ट दर्शाती है. इसे एक उदहारण के द्वारा बेहतर तरीके से समझा जा सकता है.

वास्तव में जब किसी कार्य प्रक्रिया को स्वचालन किया जाता है तो मानव श्रम अपने कार्य से हाँथ धो बैठता है.

उत्पादकता में सुधार के लिए उपाय – Measures to improve productivity in hindi

उत्पादन में सुधार को इस प्रकार समझा जा सकता है कि कार्मिक अन्य लोगों को उत्पादन या सेवाओं को विविध संसाधनों का संयोजन कर कितने प्रभावी रूप से उत्पादों का विक्रय करने को बाध्य कर पते हैं.

उपयुक्त चयन के द्वारा प्रति घंटा उत्पादकता में सुधार, उच्चतम मूल्यों तथा श्रेष्ठ आय को बनाये रखा जा सकना सम्भव है. उत्पादन मांग में वृद्धि के तुल्य अपने उत्पादों की गुणवत्ता और प्रभावित को समकक्ष प्रतिद्व्न्दीयो से बेहतर बनाये रखने की जरुरत होती है.

उत्पादकता में सुधार के उपाय –

1. सामाजिक वातावरण

अगर सामाजिक वातावरण कार्य के अनुकूल होता है तब इसके माध्यम से उत्पादकता में सुधार किया जा सकता है. इससे कार्मिकों के कार्यक्षमता में वृद्धि होने की गुंजाइस है.

2. पर्याप्त पूंजी

उत्पादकता में सुधार के लिए उपाय में पूंजी को सर्वोपरि रखा जा सकता है. क्योंकि किसी भी उत्पाद इकाई में पूंजी की विविध स्तरों उत्पादन तकनिकी यंत्र व सुविधा आदि पर आवश्यक होती है. और इसका कोई विकल्प नहीं है.

किसी भी उत्पादन इकाई में उत्पादन से लेकर उत्पाद से आय अर्जित करने की स्थिति में आने तक के लिए भी पर्याप्त पूंजी की आवश्यकता होती है. इस हेतु पूंजी की उपलब्धता बने रहना एक उत्पादन इकाई में उत्पादकता में सुधार के लिए एक अनिवार्यता है.

3. तकनिकी बदलाव

किसी उत्पादन इकाई में उत्पादकता के लिए चयनित तकनीकों से अपेक्षित परिणाम ना मिलने की दशा में तकनिकी बदलाव संबंधिति निर्णय में सहायता करता है. तथा उत्पादकता में सुधार को सुनिश्चित भी कर देता है.

4. गुणवत्ता नियमन

उत्पादन में सुधार में गुणवत्ता एक महत्वपूर्ण कारक है. और इसका उपयोग उत्पादकता में उत्पादन निर्णय प्रक्रियाओं और प्रबंधन में सम्भाव से किये जाने पर ही उत्पादन में सुधार सम्भव हो पाता है.

जिससे निर्णयन से संबद्ध कोई भी व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है.

5. प्रबंधन कौशल

प्रबंधन कौशल भी एक ऐसा उपाय है. जो उत्पादकता के सुधार में महती भूमिका का निर्वहन करता है. वास्तव में प्रबंधन तंत्र ही उत्पादों की गुणवत्ता के नियमन में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप रखता है.

6. शासकीय सहयोग

शासन उत्पादन इकाइयों के माध्यम से जनसामान्य के लिए रोजगार समेत विविध उपयोगी उपागमों की तलाश करता है. और उत्पादन इकाइयों की स्थापना से लेकर उत्पादकता तक के क्रम में पर्याप्त साथ देता है.

यह सहयोग बेसक उत्पादकता बढ़ाने में कारगर है. इस तरह से लम्बे समय तक उत्पादकता में सुधार किया जा सकता है.

7. लाभांश वितरण

यह बहुत ही कारगार और अत्यंत सवेंदनशील तरीका है. उत्पादन में निरंतर विधि का कार्मिक को लाभांश दे दिया जाये तो यह उसके लिए प्रेरक की तरह कार्य करता है.

वह और दुगने उत्साह से कार्य करता है तथा लाभांश की आशा लगातार उत्पादकता में वृद्धि करता है.

—–*****—–

आखिर में

आशा है आपको हमारा यह लेख – उत्पादकता को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Productivity in hindi) पसंद आये

जानकारी उपयोगी लगी हो तो दोस्तों के साथ shear करें.

लगातार नए-नए अपडेट पाने के लिए हमारे टेलीग्राम और जीमेल से जुड़ें.

किसी भी प्रकार की सुझाव व सलाह के लिए कॉमेंट करें – धन्यवाद.

इन्हे भी पढ़ें

RELATED ARTICLES

Leave a Reply

Most Popular

close button