quality management system : गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली क्या है?

पिछले लेख में हमने जाना की गुणवत्ता व गुणवत्ता चक्र क्या है? इस लेख Quality management system in hindi में हम गुणवत्ता को संचालित करने वाले प्रणालियों के बारे में विस्तार से जानेंगें वो भी बिल्कुल सरल शब्दों में ताकि हर उम्र का व्यक्ति quality management system को समझ पाए.

विषय-सूची

गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली क्या है – what is quality management system hindi

गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली quality management system एक तरीका, प्रकिया या कह सकते हैं कार्यविधि का एक समूह है जो किसी भी उत्पादित वस्तु में गुणवत्ता लाने के लिए प्रयोग किया जाता है यह गुणवत्ता उस वस्तु के उत्पादन से लेकर अंत तक उसमे रहती है।

इसे उदाहारण से समझते हैं – कार का निर्माण और इस्तेमाल कई सालों से होता आ रहा है परन्तु पहले के अपेक्षा आज के कार बेहतर फीचर्स के साथ कई मामलों में पुराने से अच्छे  हैं और यह केवल quality management system के बदौलत हो पाया।

अगर एक शब्दों में कहा जाये तो – किसी चीज को पहले से बेहतर करना और लगातार उसमे गुणवत्ता लाना quality management system कहलाता है।

गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के तत्व – elements of quality management system

quality management system जिन तत्वों से मिलकर के बना है उनकी सूची नीचे देखें –

  • प्रक्रियाएं
  • प्रबंधन
  • संसाधन
  • ग्राहक संतुष्टि
  • संगठनात्मक ढांचा
  • जिम्मेदारियों
  • विधियों
  • लगातार सुधार
  • व उत्पाद में गुणवत्ता

quality management system निर्माण संगठन और सेवा संगठन दोनों के लिए ही बहुत अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इन दोनों में बेहतर इसके माध्यम से ही किया जाता है।

कुल गुणवत्ता प्रबंधन (total quality management in hindi)

यह organizational स्तर पर quality management है इसके अवयवों की सूची नीचे देखें –

  • संगठन
  • योजना निर्माण
  • निर्देशन
  • नियंत्रण
  • आश्वासन

इसे total quality management इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें दो प्रकार की गुणवत्ता होती है।

  • हिस्सेदारों की आवश्यकता पूर्ति की गुणवत्ता
  • उत्पादों में गुणवत्ता

गुणवत्ता प्रबंधन के चरण – phases of quality management system in hindi

पिछले लेख क्वालिटी सर्कल क्या है.. में हमने जाना था कि जापान और चीन में किस तरह गुणवत्ता चक्र का विकास अन्य देशों की तुलना में बेहतर था, बात करते हैं गुणवत्ता प्रबंधन (quality management) के चरण की तो उसी जापान के हिसाब से या जापान में इसे चार चरण में लिया जाता है, जिनकी सूची नीचे देखें –

कैजन (kaizen)

सायद आप जानते ही होंगे की kaizen लगातार सुधार की प्रक्रिया है।

atarimae hinshitsu

इसका मतलब होता है कि जिस वस्तु को जिस कार्य के लिए उत्पादित किया गया है वह अपना काम भली भांति करता है उदाहरण के लिए – कलम एक उत्पाद है जिसका कार्य लिखना है।

केंजी (kensei)

इसके तहत उत्पादन के तरीकों पर परीक्षण कर गुणवत्ता में सुधार उत्पन्न किया जाता है।

miryokuteki hinshitsu

इसका मतलब दिखावट व सजावट से है, उदाहरण के लिए -जूतों का उत्पादन किया जाता है तो उसकी सजावट ऐसी होनी चाहिए की ग्राहक उसे देखकर खुश हो जाए।

total quality management : a historical perspective 

quality management system जिन घटकों को विकसित करती है वे हैं –

  • गुणवत्ता नियंत्रण (quality control)
  • गुणवत्ता आश्वासन (Quality Assurance)
  • कुल गुणवत्ता नियंत्रण (total quality control)
  • कुल गुणवत्ता प्रबंधन (total Quality Management)

गुणवत्ता नियंत्रण (quality control)

quality control system बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य में से एक है इसे इस प्रकार से समझा जा सकता है कि जिनके पास तकनीकों और उपकरणों का समूह होता है जिनका उद्देश्य किसी फर्म के लिए कम से कम लागत में उच्च गुणवत्ता देना होता है या निर्माण करना होता है। इसके तहत कई प्रकार के पद्धतियों का प्रयोग किया जाता है।

  • सैम्पलिंग
  • कंट्रोल चार्ट
  • गुणों द्वारा नियंत्रण
  • चरों द्वारा नियंत्रण

इस कार्य में कर्मचारियों की भागीदारी ना के बराबर होती है क्योंकि इस कार्य में quality control के परीक्षक भाग लेते हैं इस system में बहुत ही कम समय खपत होता है।

गुणवत्ता आश्वासन (quality assurance)

इस प्रक्रिया के द्वारा उत्पादित वस्तु का रुपरेखा तैयार किया जाता है इस उद्देश्य के लिए गुणवत्ता सम्बंधित मानकों का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण के लिए ISO 9000 एक अंतरास्ट्रीय मानक है जो यह समझने में मदद करता है कि कोई भी संगठन कैसे स्थापित होता है और एवं एक प्रभावी गुणवत्ता प्रणाली (quality system) को कैसे कायम रखता है।

इस system में ग्राहकों को भरोसा दिलाया जाता है कि जो उनकी मांग या रिक्वायरमेंट है उन्हें पूरा किया जायेगा, इस system को व्यवस्थित करने में छ से बारह महीने का समय लग जाता है। 

कुल गुणवत्ता नियंत्रण (total quality control)

इस system के तहत लागत को कम करने का प्रयास किया जाता है. गुणवत्ता को system के रूप में संगठित किया जाता है, एक बार quality सुनिश्चित हो जाने के बाद यह system कार्य करना प्रारम्भ कर देता है सुधार चक्र के दौरान प्रमुख समस्याओं के क्षेत्र का निर्धारण किया जाता है और समस्या समाधान की पद्धतियों का प्रयोग किया जाता है।

कॉस्ट ऑफ क्वॉलिटी से प्रदर्शन का पता चलता है जिसकी वजह से उत्पादन की गुणवत्ता में बढ़ोतरी होती है। total quality control system में अनेक क्वालिटी सर्किल की भागेदारी होती है। ऐसी प्रणाली को स्थापित करने में लगभग 3 वर्ष का समय लगता है। 

कुल गुणवत्ता प्रबंधन (total quality management in hindi)

यह प्रणाली total quality control के जरुरी सकल्पनाओं पर आधारित है इस प्रबंधन का मुख्य उदेश्य ग्राहकों को पूरी तरह से संतुष्ट करना है इस प्रणाली को स्थापित करने में लगभग 5 वर्ष का समय लगता है। 

friend’s total quality management में बहुत पहले से विकास होता आ रहा है, अलग-अलग गुणवत्ता वशेषज्ञों ने इसे कई रूपों में परिभाषित किया है जो इस तरह है –

वाल्टर ए शेवार्ट

1920-30 के समय में वाल्टर ए शेवार्ट बेल लैब में एक संख्यिकविद के रूप में कार्य करते थे, उन्होंने अपने अध्ययन से यह साबित किया कि विचरणशीलता निर्माण की सभी प्रक्रियाओं में मौजूद होती है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विचरणशीलता को ख़त्म कर गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है। walter a shewart को quality control के ग्रैंड फादर के रूप में भी जाना जाता है।

एडवार्ड डेमिंग

इन्हे quality management के जनक के रूप में जाना जाता है, एडवार्ड डेमिंग 1940 में न्यूयार्क सिटी में सांख्यिकी के प्रोफ़ेसर थे, दूसरे महायुद्ध के बाद उन्होंने जापान के कई कंपनियों में गुणवत्ता सुधार प्रक्रिया के लिए मदद की।

और उन्होंने 14 तरीके सामने रखे जिनसे गुणवत्ता विकास प्राप्त किया जा सकता था।

जोसेफ एम जुरन

इन्होने गुणवत्ता त्रिक प्रस्तुत किये जो निम्न है –

  • गुणवत्ता योजना
  • गुणवत्ता नियंत्रण
  • गुणवत्ता सुधार

अरमाण्ड वी. फेईगेनबेम 

इन्होने total quality control की संकल्पना का प्रतिपादन किया और अपने book में 40 गुणवत्ता सिद्धांतों को प्रस्तुत किया। 

फिलिप बी. क्रोस्बे 

इनका एक कथन “गुणवत्ता निशुल्क है” अत्यधिक प्रचलित हुआ और इनका योगदान भी सराहनीय है। 

ईशीकावा 

इन्हे गुणवत्ता उपकरणों के विकास के लिए जाना जाता है व इनके मुख्य उपकरण कॉज एंड इम्पेक्ट डायग्राम है जिशे फिशबोन या ईशीकावा डायग्राम के नाम से भी जाना जाता है।

व इन आरेखों का उपयोग गुणवत्ता quality सम्बंधित समस्याओं के समाधान के लिए किया जाता है। वे हमेसा इस बात पर जोर देते थे कि गुणवत्ता सुधार संबधित संगठन पर सभी कर्मचारियों को भाग लेना चाहिए। 

जेनिची टाशी 

ये जापान के गुणवत्ता विशेषज्ञ थे इनका कहना था कि उत्पादन से पहले ही गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए और सस्ता व सरल उत्पाद निर्मित करना चाहिए। 

गुणवत्ता विशेषज्ञ और उनके द्वारा दिया गया योगदान

गुणवत्ता विशेषज्ञउनका प्रमुख योगदान 
वाल्टर ए शेवार्ट विचरणशीलता प्रक्रिया की संकल्पना 

सांख्यिक नियंत्रण चार्ट की संकल्पना

एडवार्ड डेमिंग गुणवत्ता के लिए प्रबंधन की जिम्मेदारी की संकल्पना

गुणवत्ता सुधार के लिए 14 पाइंट सिद्धांत दिए 

जोसेफ एम जुरन गुणवत्ता परिभाषा “उपयोग के लिए उपयुक्तता की संकल्पना 

गुणवत्ता लागत की संकल्पना 

अरमाण्ड वी फेईगेनबेम कुल गुणवत्ता नियंत्रण की संकल्पना 
फिलिप बी क्रोस्बे “गुणवत्ता निःशुल्क होती है” की संकल्पना 

 शून्य तृटि की संकल्पना 

ईशीकावा कॉज एवं इंफेक्ट डायग्राम की संकल्पना

“आंतरिक ग्राहक” की संकल्पना

टाशी उत्पादन डिजाइन की संकल्पना

क्षय फलन की संकल्पना 

ग्राहक फोकस (customer focus)

total quality management की खास बात यह है कि ये ग्राहक को विशेष ध्यान देते हैं, इनका मानना है कि अगर कोई वस्तु ग्राहक को संतुष्ट नहीं करती तब उस वस्तु का कोई मूल्य नहीं है,

हलाकि हर बार ग्राहकों को खुश रखना संभव नहीं है क्योंकि ग्राहकों की मांग दिन ब दिन बदलती जाती है और हर एक ग्राहक की आवश्यकता दूसरे ग्राहक से अगल व भिन्न होती है। 

निरंतर सुधार (continuous improvement)

लगातार सुधार total quality management की अन्य महत्वपूर्ण संकल्पना है इसमें लगातार धीरे-धीरे होने वाले सुधार को रखा गया है क्योंकि इसके अनुसार एक बार ही दवा की बड़ी गोली लेने से बेहतर है थोड़ा-थोड़ा करके गोली लगातार लिया जाये। 

निरंतर सुधार के दो प्रकार –

PDSA चक्र PDSA Cycle 

किसी कंपनी को लगातार सुधार के लिए इसकी आवश्यकता होती है, इसे शेवार्ड चक्र या डेमिंग चक्र के नाम से भी जाना जाता है इस चक्र की संरचना वृत्त प्रकार की है जो यह साबित करती है कि सतत सुधार कभी ना समाप्त होने वाली प्रक्रिया है। इसके अंदर शामिल है –

  • योजना बनाना (planning)
  • कार्य करना (doing)
  • अध्ययन करना (studying)
  • उसके अनुसार कार्य करना (acting)

बेंचमार्किंग (benchmarking)

इसमें दूसरी कंपनियों के गतिविधयों की तुलना की जाती है यही बेंचमार्किंग कहलाता है। 

गुणवत्ता फलन फैलाव (quality function deployment)

यह ग्राहक के आवश्यकताओं और उत्पादन के बीच की कणी है इससे लक्ष्य निर्धारण करने में मदद मिलती है। 

quality function deployment के चरण –

  • बाजार सर्वेक्षण कर ग्राहकों की आवश्यकताओं का निर्धारण। 
  • ग्राहक गुणों और उत्पादन गुणों का सम्बन्ध। 
  • उत्पादन गुणों का मूल्यांकन और लक्ष्य निर्धारण। 
  • उत्पाद गुणों का निर्धारण कर उत्पाद प्रक्रियाओं का विस्तृतीकरण। 
  • तुलनात्मक अध्ययन द्वारा प्रतियोगियों के उत्पादों का मूल्यांकन। 

गुणवत्ता (quality) मैट्रिक में निम्न सेक्सन होते हैं – 

  • what section 
  • how section 
  • what how section 
  • how much section 
  • correlation section 
  • importance rating section 
  • customer assessment section and 
  • engineering assessment section 

गुणवत्ता गृह को विकसित करने के चरण –

  • सबसे पहले what सेक्शन की पूर्ति करना यह कॉलम ग्राहकों की आवश्यकता को प्रदर्शित करता है। 
  • how सेक्शन की पूर्ति यह system के प्रदर्शन को दर्शाता है। 
  • what-how सम्बन्ध वाले कॉलम में डिजाइन पैरामीटर के बीच के अंतर्संबंधों की पूर्ति की जाती है।
  • ग्राहकों की धारणाओं के अध्ययन के लिए कंपनी के वर्तमान उत्पाद की तुलना प्रतिद्वंदी के उत्पादों से की जाती है।

total quality management के अंदर विभिन्न गुणवत्ता उपकरण होते हैं जो quality का मूल्यांकन करते हैं और समस्याओं का निवारण में अपना सहयोग देते हैं। जैसे –

कॉज एंड इन्फेक्ट आरेख : ये चार्ट किसी खास गुणवत्ता (quality) सम्बंधित समस्याओं को दर्शाते हैं। 

फ्लोचार्ट : यह किसी प्रक्रिया के चरण का सूची क्रम चित्र होता है। 

चेकलिस्ट : यह सामान्य त्रुटियों की एक सूची होती है। 

कन्ट्रोल चार्ट : इसका उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि कोई प्रक्रिया अपने निर्धारित लक्ष्यों के सीमा के अंदर कार्य कर रही है या नहीं। 

स्कैटर डायग्राम : यह ग्राफ दर्शाता है कि दो चर राशिया किस प्रकार से एक दूसरे से सम्बंधित है। 

परेटो एनालिसिस : यह एक ऐसा पद्धति है जो quality संबंधित समस्याओं को उनके महत्व के प्राथमिकताओं के आधार पर निर्धारित करता है। 

हिस्टोग्राम : यह चार्ट किसी चर के मानो को बारम्बारता वितरण को दर्शाता है। 

प्रक्रिया प्रबंधन (process management)

total quality management के अनुसार उत्पादित वस्तुओं में quality का उपस्थित होना गुणवत्ता प्रक्रिया का ही एक परिणाम है। इसका तात्पर्य है कि गुणवत्ता को प्रक्रिया में ही उत्पन्न करना चाहिए उत्पादन प्रक्रिया के बाद त्रुटिपूर्ण उत्पादों को संसोधित करने के बजाय उत्पाद के माध्यम में ही quality उत्पन्न करना बेहतर है। यदि समस्या में माध्यम को संसोधित नहीं किया जाए तो समस्याएं बनी रहेगी 

इसे उदहारण से समझते हैं – बेकिंग कुकी बनाने के प्रक्रिया में कुछ कुकी जल जाते हैं. तो इन्हे केवल फेक देना ही समस्या का समाधान नहीं है बल्कि इस समस्या के कारणों का पता लगाना आवश्यक है जिसमे तापमान सेटिंग, पैन की जांच ओवन की जांच आदि के द्वारा समस्या का समाधान किया जा सकता है।

आपूर्तिकर्ता की गुणवत्ता का प्रबंधन (managing supplier quality)

total quality management की गुणवत्ता संकल्पना कंपनी के आपूर्तिकर्ता पर भी लागु होता है, पारम्परिक रूप से कंपनियों के पास कई आपूर्तिकर्ता होते हैं जो प्रतियोगी मूल्य बोली में शामिल होते हैं।

सामग्रियों के आने के बाद उनकी गुणवत्ता की जांच के लिए परिक्षण कार्य प्रारम्भ हुआ। total quality management इस प्रक्रिया को quality की निम्न कोटि के लिए जिम्मेदार मानता है। व इसमें धन एवं समय की बर्बादी होती है।

total quality management के अनुसार गुणवत्ता की संकल्पना को आपूर्तिकर्ताओं द्वारा भी अपनाया जाना चाहिए। यदि आपूर्तिकर्ता पूर्व निर्धारित गुणवत्ता के मापदण्डों को पूरा करते हैं तो सामग्रियों की परीक्षण की आवश्यकता नहीं पड़ती। 

आज की गुणवत्ता संकल्पना जिसे total quality management in hindi के रूप में माना जाता है उत्पान की प्रक्रियाओं में गुणवत्ता उत्पन्न करने पर बल देता है न कि उत्पादन प्रक्रिया के बाद परीक्षण पर total quality management ग्राहक संचालित होती है एवं सम्पूर्ण कंपनी को शामिल करती है इसके लिए हमें गुणवत्ता लागतों के चार वर्गों को समझना पड़ता है जो नीचे हैं –

  • रोकथाम लागत 
  • मुल्याँकन लागत 
  • आंतरिक असफलता लागत 
  • बाह्य असफलता लागत। 

गुणवत्ता के लिए दिए जाने वाले पुरुस्कार (Award for Quality)

quality के लिए कुछ दिए जाने वाले कुछ अवार्ड्स इस प्रकार हैं –

malcolm baldrige national quality award

इसकी स्थापना 1987 में हुई थी इस अवार्ड का नाम पूर्व वित्त सचिव के नाम पर रखा गया था इनका उद्देश्य उन कंपनियों को सम्मानित करना है जो high quality के मानकों का प्रदर्शन करते हैं। इसे 3 वर्गों में बाटा गया है –

  1. निर्माण कम्पनियाँ
  2. सेवा कम्पनियाँ
  3. लघु व्यवसाय

पुरुष्कार से सम्मानित कम्पनियाँ

  • मोटोरोला कार्पोरेशन
  • जीरोक्स
  • फेडेक्स
  • IMB
  • etc.

पुरुस्कार को पाने की प्रक्रिया : इन पुरुस्कारों को प्राप्त करने के लिए एक लम्बी आवेदन पत्र जमा करना पड़ता है जिसके बाद उसकी सुरुवात  जांच होती है, जिसमे जांच की प्रक्रियाए निम्न है –

  • नेतृत्व 
  • नीतिगत योजना 
  • ग्राहक एवं बाजार फोकस 
  • सुचना एवं विश्लेषण 
  • मानव संसाधन फोकस 
  • प्रक्रिया प्रबंधन 
  • व्यावसायिक परिणाम 

डेमिंग पुरुस्कार (deming prize)

यह जापान में दिया जाने वाला एक पुरुस्कार है जो कंपनियों को उनके गुणवत्ता सुधार के सम्बन्ध में देती है। इस पुरुस्कार का नाम एडवर्ड डोमिंग के नाम पर रखा गया है इसे 1984 में प्रारम्भ किया गया, डेमिंग पुरुस्कार प्राप्त करने वाली प्रथम कंपनी US की फ्लोरिडा पावर एंड लाइट थी जिसने यह अवार्ड 1989 में प्राप्त की। 

ISO 9000 अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रणाली मानक (ISO 9000 international quality system standards)

इस पद्धति को 1987 में अपनाया गया, यह एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका उद्देश्य गुणवत्ता मानकों पर एक सहमति स्थापित करना होता है। आज के समय में 91 देश इसके सदस्य है. ISO के नियमों में समय समय में परिवर्तन होता रहता है। ISO प्रमाणित कम्पनियाँ यह साबित करती है कि उन्होंने ISO के सभी गुणवत्ता (quality) निर्धारित मानकों को पूरा कर लिया है। 

ISO 9000 के कुछ विशेषताएं इस प्रकार हैं –

  • ISO 9000 प्रमाण प्रमाणित लेखा परीक्षकों द्वारा प्रदान किये जाते हैं। 
  • पंजीकरण का निर्धारण ग्राहकों की आवश्यकताओं एवं प्रतिस्पर्धा दबाओं के द्वारा किया जाता है। 
  • आवश्यकता पड़ने पर प्रबंधन सांख्यिक पद्धतियों का प्रयोग कर सकता है। 
  • गुणवत्ता प्रणाली का उद्देश्य आवश्यकता के अनुरूपता को निर्धारित करना है। 
  • यह इस बात को सत्यापित करती है कि फैक्ट्री कार्यालय व प्रयोगशाला सभी पूर्व निर्धारित गुणवत्ता सम्बंधित आवश्यकताओं को पूरा करे। 
  • ISO 9000 की प्रमुख आवश्यकता दस्तावेजीकरण एवं प्रमुख उदेश्य समरूपता योजना नियत्रण एवं परीक्षण के वस्तुनिष्ट प्रमाण प्रदान करना होता है। 

ISO 9000 कंपनियों को यूरोपियन मार्केट में अपने उत्पादों के विपणन में मदद करती है, कम्पनियों के लिए यह आवश्यक है कि ISO 9000 से अवश्य ही प्रमाणित हो,  क्योंकि ISO प्रमाणित कम्पनियों के लिए ग्राहकों को अपनी गुणवत्ता समझाने में आसानी होती है। 

ISO 9000 : 2000 quality management system 

basic things and standards : मानकों की प्रणाली को समझने में यह सुरुवाती चरण है।

ISO 9001 : 2000 quality management system 

आवश्यकताएं : यह वे मानक हैं जिसका प्रयोग फर्म के quality management system के प्रमाणीकरण में किया जाता है, इसका प्रयोग इस बात को साबित करने में किया जाता है कि गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (quality management system) एवं ग्राहकों के मध्य अनुपात है।

ISO 9004 : 2000 quality management system 

प्रदर्शन के लिए दिशा निर्देश : यह quality management system स्थापित करने के लिए दिशा निर्देश प्रदान करती है इसका मुख्य उदेश्य ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा करना नहीं बल्कि प्रदर्शन में सुधार लाना भी होता है। 

इन तीन मानकों का प्रयोग बहुत सी कमपनियाँ बड़े पैमाने पर करती है, हालांकि ISO 9000 के मानकों के परिवार में दस और प्रकशित मानक एवं दिशा निर्देश शालिम है। ISO प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए किसी कंपनियों को अपनी गुणवत्ता में सबंधित दस्तावेजों को प्रदान करना होता है। इसमें निम्न दस्तावेज शालिम है –

  • कार्य विवरण 
  • कर्मचारियों की प्रशिक्षण विधियां एवं उनकी आवृतियां 
  • गुणवत्ता निरिक्षण में उपयोग की जाने वाली विधियां 
  • परीक्षण कार्यक्रम 
  • शांख्यिकी नियंत्रण प्रक्रिया उपकरण। 

सभी प्रक्रियाओं के लिए high quality वाले दस्तावेज जरुरी होते हैं। 

ISO प्रमाणीकरण के अंतर्गत निम्नलिखित चरणों को शामिल किया जाता है –

  • कंपनी की सभी प्रक्रियाओं का high quality दस्तावेज 
  • रजिस्ट्रार द्वारा कंपनी का अंकेक्षण 
  • अंकेक्षण प्रक्रिया में सभी चीजे सही पाए जाने पर कम्पनी को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। 
  • प्रमाणीकरण के पश्चात कम्पनी को ISO के नियमो का पालन करना होता है। 

इस सब प्रक्रियाओं में लगभग 2 वर्ष का समय लग जाता है और इसकी लागत 30000 डॉलर के आस-पास होती है साथ ही हर तीन वर्ष के बाद इसे रिनिवल कराना पड़ता है। आज के समय में लगभग 40000 कम्पनियाँ ISO प्रमाणित है अगर देखा जाए तो वास्तव में सभी उद्योग में व्यवसाय करने के लिए प्रमाणीकरण एक आवश्यक अंग है। 

ISO 1400 मानक (ISO 14000 standards)

quality के मानकीकरण की आवश्यकता ने अन्य मानको के विकास के लिए एक आवेग उत्पन्न किया, सन 1996 में अंतर्राष्ट्रीय मानक संगठन ने कम्पनी में पर्यावरण संबंधित जिम्मेदारियों के मूल्यांकन के लिए एक मानक को प्रस्तावित किया जो ISO 1400 के रूप में जाना जाता है। यह प्रमुख तीन क्षेत्रो पर केंद्रित होता है –

  • management system standards : यह सिस्टम विकास और उसके पर्यावरण सम्बन्धी जानकारियों का सम्पूर्ण व्यवसाय के रूप में मूल्यांकन करती है। 
  • operating system standards : इसके तहत प्राकृतिक संसाधनों एवं ऊर्जा की खपत का मूल्यांकन होता है। 
  • environmental system standards : यह उत्सर्जन एवं अन्य अपशिस्टों का मूल्यांकन करता है। 

निष्कर्ष 

आप जानते ही हैं कि quality का हमारे जीवन में कितना महत्व है, कोई भी व्यक्ति क्वालिटी  के साथ कंप्रोमाइज नहीं करना चाहता, भले ही चीजे थोड़ी महगी क्यों ना हो परन्तु बेहतर quality जरुरी है। हमारा यह लेख quality management system in hindi इसी को बेहतर तरीके से समझाती है। 

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