उद्यमिता और उद्यमी क्या है? | what is entrepreneurship in hindi

Entrepreneurship in hindi : पैसा लगभग हर किसी की जरुरत है. पैसे की आवश्यकता हमें अपने जीवन में सुरुवात से अंत तक होती है even.. अंत के बाद भी अपने आने वाली पीढ़ी की आर्थिक सुरक्षा व उनके आवध्यकताओं की पूर्ति के लिए पड़ती है.

हर व्यक्ति पैसे कमाने के लिए ही कार्य करता है, चाहे वह कोई doctor हो इंजिनियर, शिक्षक हो या मजदुर ही क्यों ना हो. चाहे पैसे कमाने का माध्यम सरकारी नौकरी हो या स्वरोजगार हो, कहीं न कहीं से जीवन यापन के लिए पैसे आना आवश्यक है.

उद्यमिता भी पैसे कमाने का एक साधन है परन्तु इसमें नए-नए चीजों का अविष्कार भी होता है। आज के इस लेख उद्यमिता क्या है, उद्यमी क्या है (what is entrepreneurship in hindi) में हम इस बातों को विस्तार से जानेंगें।

Entrepreneurship Meaning In Hindi

Entrepreneurship Meaning = उद्यमिता, अर्थात Entrepreneurship का हिंदी मतलब उद्यमिता होता है।

विषय-सूची

उद्यमी क्या है – What is Entrepreneur in hindi

Entrepreneur

उद्यमी (Entrepreneur) उस व्यक्ति को कहा जाता है जो उद्यम और project business marketing पर अपना नियंत्रण रखता है. एक उद्यमी को उद्यम और परियोजना की सभी जिम्मेदारियां जैसे जोखिम उठाना, फैसले लेना अन्य बड़े कार्य करने पड़ते हैं.

एक प्रकार से कहा जाये तो उद्यमी (Entrepreneur) हजारों दिमाग वाला नेता की तरह होता है जो business के बड़े फैसले लेता है और सफलता या असफलता (आर्थिक हानि) सभी के लिए जिम्मेदार होता है.

एक line में कहा जाये तो…. उद्यमी (Entrepreneur) ठेकेदार, पूंजी, और श्रम के बीच की कड़ी होती है, जो हर प्रकार के जोखिम उठाने के लिए तैयार रहता है. एक Entrepreneur को अनेकों प्लान और बेहतरीन दिमाग के साथ कार्य करना होता है. उदाहरण के लिए हाल ही के बहुत ही चर्चित उद्यमी एलन मस्क हैं.

उद्यमिता क्या है? – what is Entrepreneurship

उद्यमिता एक business की तरह होता है, जिसमे भरपूर लाभ व अत्यधिक पैसा कमाया जाता है साथ ही असफल होने पर अत्यधिक जोखिम व हानि उठाना भी पड़ता है। एक उद्यमी (Entrepreneur) जोखिम उठाने के लिए हमेसा तैयार रहता है।

उद्यम में अनेक नए चीजों का अविष्कार भी होता है। उद्यमी, उद्यमिता (Entrepreneurship) द्धारा अपने एक छोटे से आइडिया (plan) को बहुत बड़े business के रूप में परिवर्तित करता हैं और अपने सोंच से क्रांति लाता है, उद्यमिता कहलाता हैं।

उद्यमिता का महत्व – Importance of Entrepreneurship

किसी भी देश में उद्यमिता (Entrepreneurship in hindi) का महत्व निम्न कारणों से होता है –

  • किसी भी देश की आर्थिक उन्नति के लिए औद्योगिक प्रगति का होना अनिवार्य है, जो उद्यमिता (entrepreneurship) से ही संभव है।
  • उद्यमिता (entrepreneurship) से पूंजी का विकेन्द्रीकरण होता है।
  • एकाधिकार को उद्यमिता entrepreneurship द्धारा ही कम किया जा सकता है। 
  • शहरों की आबादी में वृद्धि को रोका जा सकता है। 
  • उद्यमिता (entrepreneurship) से रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है। 
  • entrepreneurship से जिस क्षेत्र में लाभ अर्जित किया जाता है, उससे उसी क्षेत्र का विकास किया जा सकता है। 
  • अनेक क्षेत्रों में संतुलन प्रगति के लिए सहायक है।  

उद्यमिता का दृश्टिकोण?

एक उद्यमी (entrepreneur) के लिए सकारात्मक दृश्टिकोण (Positive approach) का होना अत्यधिक आवश्यक है। अगर किसी entrepreneur के पास तकनिकी और आर्थिक सुविधाएँ तो है.

परन्तु उसमे सकारात्मक दृश्टिकोण का आभाव है, तब वह एक सफल entrepreneur नहीं बन सकता, साथ ही एक entrepreneur के पास धैर्य, परिस्तिथियों का उचित विश्लेषण करने की क्षमता, व दूसरों के विचारों का प्रोत्साहन का दृश्टिकोण होना भी अधिक आवश्यक है। 

एक उद्यमी का मकसद क्या होना चाहिए?

उद्यमी (entrepreneur) का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना तो होता ही है, उसके साथ ही एक उद्यमी को समाज को एक बेहतर स्तिथि में पहुंचाने तथा अर्थव्यवस्था में योगदान देना भी होता है। एक उद्यमी को उपभोक्ताओं माँगों एवं उनकी खरीदने की क्षमता के अनुसार अपने लाभ को व्यवस्थित करना होता है।

ऐसा करके ही कोई उद्यमी (entrepreneur) अपनी उद्यम को स्थापित और उसका विकास कर सकता है। वैसे तो उद्यमिता (entrepreneurship) के लिए कई कारण उत्तरदायी है, किसी entrepreneur की कुशलता, वस्तु की मांग एवं बेहतर प्रबंधन की क्षमता ही उसे entrepreneurship की ओर आकर्षित करता है। 

एक उद्यमिता की क्षमताएं – Ability of Entrepreneurship

उद्यमी (entrepreneur) की क्षमता किसी भी उद्यम के लिए अति आवश्यक है, क्योकि एक क्षमतावान entrepreneur ही एक अच्छा उद्यम स्थापित कर सकता है। उद्यम स्थापित करने के लिए निम्न उद्यमशील क्षमता होनी चाहिए –

  • सबसे पहली बात यह की लक्ष्य के प्रति entrepreneur को दृढ होना चाहिए। 
  • समस्याओं के सम्बन्ध में जानकारी और उनका उचित निर्णय की क्षमता होनी चाहिए। 
  • नौकरी से अलग सोंचकर नए उत्पाद, नए अवसर को अपनाने की पहल होनी चाहिए। 
  • उपयुक्त अवसर को अपनाना आना चाहिए। 
  • कार्य के गुणवत्ता के प्रति हमेसा सजग रहना चाहिए। 
  • न्यूनतम लागत पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए। 
  • क्रमबद्ध योजना से कार्य को करना चाहिए। 
  • एक entrepreneur का आत्म विश्वास हमेसा ऊचा होना चाहिए। 
  • उद्यम कार्यों में पर्याप्त निगरानी होना चाहिए। 

इन सब बातों को ध्यान रखकर एक सफल entrepreneur बना जा सकता है।   

उधमिता के सैद्धांतिक मुद्दे

उद्यमिता (entrepreneurship) का सिद्धांत वाद-विवाद का विषय है, और इसको विद्वानों द्धारा अलग-अलग तरीके से परिभाषित किया गया है. कोई इसको जोखिम भरा मानते हैं और कोई नवाचार।

आइये इसकी समीक्षा करते हैं –

उद्यमिता जोखिम भरा

एक नए enterprise की उत्पत्ति सभी प्रकार के जोखिमों से भरा हुआ होता है, क्योकि कुछ नया करना जोखिम की ही श्रेणी में ही आता है। enterprise लाभ भी अर्जित करता है और हानि भी। परन्तु यह अनेक कारकों पर निर्भर करता है।

जैसे उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतें, बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा (Competition) कच्चे माल की कमी इत्यादि। एक entrepreneur को इतना साहसी होना चाहिए की वह हजारों प्रकार के मुश्किलों को पार करते हुए सफलता प्राप्त कर सके।

entrepreneur की यही जोखिम उठाने की क्षमता उसको सभी प्रकार की विफलताओं से पार करते हुए एक सफल entrepreneur बनाती है। 

उद्यमिता नवाचार

इसका तात्पर्य नए-नए चीजों के अविष्कार से है। एक entrepreneur हमेसा उपभोक्ताओं के लिए कुछ नया, भिन्न-भिन्न व अनमोल करने दी दिशा में कार्य करता रहता है। उद्यमियों को नए उत्पाद के लिए किसी शोधकर्ता की आवश्यकता नहीं होती अपितु ये उनके स्वभाव में ही निहित होती है।

entrepreneur अपनी क्षमताओं का उपयोग कर उद्योग-धंधों को नई उत्पादन विधिया या उपभोक्ताओं के लिए best प्रदान करते रहते हैं। उदाहरण के लिए उपभोक्ताओं के संतोष, बदलती जरुरत को ध्यान में रख कर अनेक प्रकार के फलों के रस, शीतल पेय पदार्थ बोतलों के साथ-साथ टिन पैक में भी आ रहें है।

क्योकि बोतलों की तुलना में टीन पैक का उपयोग करना बहुत ही आसान है। साथ ही अपशिस्ट के रूप में टीन का दोबारा सहीं से उपयोग किया जा सकता है। एक उदाहरण है – रतन टाटा जी ने ऑटो वाहन का अविष्कार नहीं किया, परन्तु उन्होंने लोगों की  कम कीमत पर छोटे कार की जरूरत को जरूर पूरा किया। 

उद्यमिता और प्रबंधन

एक तरह से दोनों सामान ही है, परन्तु दोनों में पर्याप्त भिन्नता भी है। इस दोनों की विभिन्नता को जानना बहुत ही आवश्यक है, क्योकि ये दोनों ही उद्यम के आधार स्तम्भ है। इन दोनों ही की महत्ता इतनी अधिक है की दोनों को एक दूसरे के equivalent रखा गया है ना की ऊपर निचे। आइये उद्यमिता एवं प्रबंधन के विभिन्नताओं को जानते है –

  • Entrepreneur व्यवसाय सृजन के साथ ही प्रारम्भ हो जाती है, जबकि प्रबंधन उत्पाद निर्माण की बाद की प्रक्रिया होती है। 
  • एक Entrepreneur उद्यम का मालिक और प्रबंधक employee होता है। 
  • Entrepreneur का reward capital gains, asset acquisition, cash flow व dividend के रूप में आता है, जबकि प्रबंधन का reward वेतन, पदोन्नति, लाभांश एवं incentives के रूप में आता है। 
  • जोखिम और अनिश्चितता उद्यमिता का अंग है, जबकि प्रबन्धन जोखिम को अनदेखी करने वाला होता है। 
  • उद्यमियों का लक्ष्य व्यवसाय का असीमित विस्तार करना होता है, जबकि प्रबंधकों का small aims को प्राप्त कर वेतन वृद्धि करना होता है।
  • Entrepreneurship में सर्वाधिक वरीयता उद्यमियों की वित्तीय स्वतंत्रता को दी जाती है, जबकि प्रबंधन के लिए सर्वाधिक वरीयता सुरक्षा को दी जाती है, जैसे – वेतन में वृद्धि, पेंशन इत्यादि। 
  • Entrepreneurship के अंतर्गत उद्यम की तमाम गतिविधियों के सन्दर्भ में जानने की आवश्यकता होती है। जैसे की उत्पाद डिज़ाइन और विकास व्यवसाय विधि, लेखांकन, संचार, जनता का रुख, निवेश तथा अन्य सभी कुछ जबकि प्रबंधन का दृश्टिकोण विशिष्ट होता है और वह प्रबंधन एवं व्यवसाय उत्थान पर विचार करता है। 
  • Entrepreneurship उद्यम के प्रभावी स्थायित्व से सम्बन्ध है जबकि प्रबंधन उद्यम के प्रभावी संचालन से सम्बन्घ है।

उद्यमीय की प्रेरणा

एक Entrepreneur के लिए उद्यमीय प्रेरणा अपने व्यक्तिक संतोष के लिए कुछ साहसिक कार्य करना तथा उसकी नियमितता को बनाये रखना होता है. यह केवल Entrepreneur के प्रगति के लिए ही नहीं होता है बल्कि समाज के लिए अनेक नजरिये से उपयोगी होता है.

उद्यमीय प्रेरण का ग्राफ यहाँ पर ही नहीं रुक जाता बल्कि यह जोखिम पर काबू पाने की काबिलियत उद्यमियों में विकशित करता है, यह ही किसी देश की आर्थिक प्रगति का मार्ग प्रसस्थ करता है।   

उद्यमी की भूमिका एवं कार्य –

उद्यमी की भूमिका (Entrepreneur role) : आर्थिक विकास का मतलब किसी भी देश की वास्तविक प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि से है। उदाहरण के लिए वर्तमान में विकशित देश अमेरिका व जापान से पता चलता है की अर्थव्यवस्था एक प्रभाव है जिसका कारण उद्यमिता (Entrepreneurship) है।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने महसूस किया की आर्थिक विकास का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए देश में परिणात्मक एवं गुणात्मक दोनों उद्यमिताओं से वृद्धि करना आवश्यक है। एक उद्यमी (Entrepreneur) में आर्थिक विकास में भूमिका को और स्पष्ट रूप में उनके कार्यों के द्धारा समझा जा सकता है।   

उद्यमी के कार्य?

  • निर्णय सम्बन्धी (decision related)- यह किसी भी उद्यम के सुरवात के समय उसकी नींव बनाने के लिए किये जाते है। 
  • उद्यम चयन (industry selection)- Entrepreneur अपनी रूचि और क्षमताओं के अनुसार ही उद्यम का चयन करता है इससे उद्यम के सफल होने का संभावनाएं भी अधिक होता है। 
  • उत्पाद चयन (product selection)- एक Entrepreneur सुरुवात में ही बाजार के मांग को देखते हुए निर्णय ले लेता है की वह क्या-क्या उत्पादित करेगा। 
  • उत्पादन का पैमाना (scale of production)- Entrepreneur उद्यम सुरवात के समय ही यह निर्णय ले लेता है की उद्यम में उत्पादन छोटे स्तर पर किया जायेगा या बड़े स्तर पर। 
  • स्थान का निर्धारण (place determination)- Entrepreneur सुरुवात में ही यह तय करता है की उद्यम के लिए कौन सा स्थान सहीं रहेगा, कौन से स्थान में कच्चा माल पर्याप्त मात्रा में मिल जायेगा, जहा पर्याप्त मात्रा में वाहन आने जाने की साधन हो इत्यादि-इत्यादि। 
  • जोखिम सम्बन्धी (risk related)- जोखिम उठाने का पूरा जिम्मेदारी  Entrepreneur का होता है, एक Entrepreneur ही उद्यम के लिए सभी प्रकार की रणनीतियां बनाता है और वह ही सफलता असफलता के लिए उत्तरदायी होता है। 

ऊपर दिए इन सभी बिंदुओं को पढ़कर आप Entrepreneur के कार्य और भूमिका को समझ सकते है।   

उद्यमी की कार्यक्षमता और रिकॉर्ड?

उद्यमी (Entrepreneur) का तात्पर्य नया व्यवसाय प्रारम्भ कर धन कमाने से है, एक उद्यमी की कार्यक्षमता असीमित होती है। क्योकि किसी भी उद्यम की स्थापना से लेकर के उसकी निरंतरता को बनाये रखना और उद्यम का असीमित विस्तार करना केवल Entrepreneur ही इसे संभव कर सकता है।

क्योकि वह उद्यम से जुडी हर गतिविधयों पर नजर रखता है। Entrepreneur अपनी उद्यमीय निर्णयों के द्धारा आर्थिक गतिविधियों को एक धारा देता है और उसके द्धारा प्राप्त सफलता ही उसकी सफलता का रिकॉर्ड निर्धारण होता है.

वह न केवल देश के औद्योगिक क्षेत्र में विकास के लिए योगदान देता है अपितु फार्म और सेवा क्षेत्र का भी असीमित विस्तार करता है। 

सफल उद्यमी की विशेषताए?

  • समय को महत्व को समझना और समय बर्बाद (समय का पाबंद) ना करना। 
  • क्या उचित होगा क्या अनुचित इसके बारे में सोच समझ कर कार्य करना। 
  • सहीं अवसर को पहचान कर उसका लाभ उठाने की क्षमता होनी चाहिए। 
  • समय और परिस्थिति को देखकर कार्य करने की क्षमता हो। 
  • अपने और दूसरों के अनुभव से सीखना। 
  • व्यवस्था करने में कुसल एवं अच्छा प्रबंधक होना। 
  • एक Entrepreneur को अपनी कार्क्षमता और सफलता पर विश्वास होना चाहिए। 
  • एक बार किसी निश्चय करने के बाद उसे किसी भी हाल में अवश्य पूरा करें। 
  • परम्परा से हटकर कुछ नया कार्य करने की शक्ति हो। 
  • Entrepreneur कभी भी अपनी सफलता से संतुष्ट नहीं होता, और कुछ नया करता रहे। 

किसी उद्यमी के असफल होने का कारण – Reasons failure of an Entrepreneur In Hindi

एक उद्यमी का सफल और असफल होने का बराबर संभावनाएं होती है यह एक जोखिम भरा काम होता है। 

  • असफलता का एक कारण गलत व्यापार का चुनाव। 
  • पूंजी की कमी के कारण। 
  • कच्चेमाल की कमी के कारण। 
  • कर्मचारियों का गलत चुनाव के कारण। 
  • बाजार का अच्छा से ज्ञान ना होना। 
  • पुरानी तकनिकी का प्रयोग के कारण। 
  • स्थान के चुनाव में गलती। 
  • सही तरीके से प्रबंधन ना कर पाना। 
  • उत्पादन मूल्य अत्यधिक होना 
  • उचित विपड़न network की कमी। 
  • विज्ञापन की महत्व को ना समझना। 

अपने अंदर उद्यमिता का आंकलन करें

उद्यमी बनने के लिए स्वयं का मूल्यांकन करें (Self estimation entrepreneur in hindi)

  • क्या मै एक उद्यमी (Entrepreneur) बनना चाहता हूँ। 
  • क्या उद्यम जो मै करना चाहता हूँ, उसके बारे में पर्याप्त तकनिकी और अन्य जानकारियां है। 
  • क्या मै व्यवहार कुशल हूँ। 
  • क्या मेरे पास उद्यम के लिए पर्याप्त धन है। 
  • क्या मुझमे आत्मविश्वास है की मै ये कर सकता हूँ। 
  • क्या मै व्यापारिक परिस्थतियों के अनुरूप अपने आप को ढाल सकता हूँ। 
  • क्या मुझमे स्वतंत्र रूप से बिना डरे निर्णय लेने की क्षमता है। 
  • क्या मै दूरदर्शी हूँ और भविष्य में होने वाली समस्या से निपट सकता हूँ। 
  • क्या मै समय के अनुसार अपने आप को परिवर्तित कर सकता हूँ। 

स्वयं का आत्म विश्लेषण करें?

आत्म विश्लेषण बहुत ही आवश्यक है, इसी के द्धारा ही किसी संगठन की खूबियों और कमियों को पता लगाया जाता है। आत्म विश्लेषण निम्न तरीकों द्धारा किया जा सकता है। 

  • परिस्थतियों के अनुसार अपने आप को परिभाषित करना। 
  • अपने आदर्श की पहचान करना। 
  • अपने आत्म सम्मान का निर्धारण करना। 
  • अपने जीवन के मूल्यों का निर्धारण करना। 
  • अपनी विशेषताओं के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता पहचानना। 
  • अपनी शक्तियों और कमजोरियों को पहचानना। 
  • अपनी सीमाओं का निर्धारण करना। 

उद्यमिता के अवसर या मौके

Entrepreneurship तब उत्पन्न होती है जब कोई व्यक्ति अवसर व समय का लाभ उठाने की दिशा में कार्य करता है। अगर सरल शब्दों में कहें तो Entrepreneur देखता है की एक व्यक्ति अन्य व्यक्ति द्धारा बेचीं जा सकने वाली वस्तु से भी कम मूल्य पर उसी वस्तु को बेचने के लिए उत्शुक है। इन सब में सभी तरफ संतुलन बनाकर कार्य करना और खुद भी लाभ कमाना Entrepreneur की कला होती है।   

व्यावसायिक विचार के श्रोत

कही ना कही अनेक अवसरों पर व्यवसाय स्थापना पर रूचि रखने वाले लोग मिलते ही रहते हैं। जिनमे से अधिकांश के पास वित्तीय सुविधा (पैसा) तो है परन्तु उन्हें इस चीज़ का ज्ञान नहीं है कि क्या निवेश करें, क्या व्यवसाय करें। मै आपको बता दूँ की अवसर  पर्याप्त मात्रा में है आपको बस उसे पहचानना है और बिना हारे उस दिशा में कार्य करना है।

व्यावसायिक विचार आपके मन में होगा ही, व आपके आस-पास के माहौल में होगा, बस उसे पहचाने और अपना प्रतिभा दिखाएँ। 

  1. आप अपने अंतर्मन में झांके और अपने कौशल, बुद्धिमता और भावना का परीक्षण करें। 
  2. व्यापार मेलों और इससे सम्बंधित प्रोग्रामों में भाग लें। 
  3. उपभोक्ताओं की जरुरत और मांग का अवलोकन करें। 
  4. समस्या निवारक तकनीकों का अच्छे से अध्ययन करें। 

दस प्रभावशाली उद्यमियों के नाम – ten influential Entrepreneurship In Hindi

उद्यमी उसके उद्यम
एलन मस्क स्पेस एक्स के सी. ई. ओ., टेस्ला इंक के सी. ई. ओ., न्यूरा लिंक सी. ई. ओ., सोलार सिटी चेयरमेन, ओपनए आई को. चेयरमेन
बिल गेट्स माइक्रोसॉफ्ट के सी. ई. ओ. 
जेफ़ बेजोस अमेजोन के सी. ई. ओ.
पिचाई सुंदर राजन Google के सी. ई. ओ.
स्टीव जॉब्स एप्पल सी. ई. ओ. 
मार्क जुकेरबर्ग फेसबुक के सी. ई. ओ.
बिन्नी बंसल फ्लिपकार्ट के सी. ई. ओ.
रतन नवल टाटा टाटा कम्पनी 
मुकेश अम्बानी रिलायंस कम्पनी 
भविष अग्रवाल ओला कैब 
दस प्रभावशाली उद्यमियों की list

उद्यमिता से सम्बंधित कुछ शब्द – Entrepreneurship related terminology

  1. Assume – सत्य मान लेना। 
  2. Barrier – बाधा। 
  3. Company – कम्पनी (एक साथ अनेक कार्य करने वालों का समूह)
  4. Entrepreneur – उद्यमी। 
  5. Entrepreneurial – उद्यमीय (उद्यमी के साथ कुछ करने योग्य)
  6. Enterprise – उद्योग। 
  7. Generation – उत्पादन। 
  8. Industry – व्यवसाय। 
  9. Innovation – नवाचार। 
  10. Resource – स्त्रोत (वे साधन जिसका जरुरत पड़ने पर उपयोग किया जा सके)

अंतिम शब्द 

उम्मीद करता हूँ यह लेख उद्यमिता क्या है ? एंटरप्रेन्योर क्या होता है, व एंटरप्रेन्योरशिप क्या है। (what is Entrepreneur in hindi, entrepreneurship in hindi) की जानकारी आपके काम आये और जिंदगी में कुछ मूल्य डाल सके

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