Set your goal – अपना लक्ष्य कैसे बनाये कैसे लक्ष्य के प्रति कार्य करें

You are currently viewing Set your goal – अपना लक्ष्य कैसे बनाये कैसे लक्ष्य के प्रति कार्य करें
Set Your Goal – फिर यह ना कहना कि हम चूक गए

Set your goal – फिर यह ना कहना कि हम चूक गए….

सीखता वही है जो प्रयास करता है… वह नहीं जो हार या गलती के डर से प्रयास ही नहीं करता – और इसी तरह निरंतर प्रयास से सफलता प्राप्त होता है.

जिंदगी में ये कभी भी ना कहें की हम चूक गएँ या इस प्रकार का पछतावा ना होने दें कि…

  • काश जब समय था तब यह कार्य कर लेना चाहिए था?
  • काश मै यह करने की सोंच रहा था उसे कर लेता तो आज मै कहाँ से कहाँ होता

मेरी मानें तो जिंदगी में इस काश शब्द को आने ही मत दीजिये इसके लिए कहा भी गया है –

— अगर life में किसी कार्य को हार के डर से नहीं किया जाये तो हार निश्चित है. परन्तु हिम्मत करके उस कार्य को करने के प्रति समर्पित हुआ जाये तब सफलता निश्चित है.

याद रखें – हारता वह नहीं है जो कार्य करता है बल्कि हारता तो वह है जो हार के डर से कार्य ही नहीं करता,,,,, कार्य करने वाला केवल सीखता है और अनुभव प्राप्त करता है,. और उसी अनुभव से सफलता सुनिश्चित होती है.

कोशिस तो कीजिये, हार या जीत देखा जायेगा

Set Your Goal

अगर एक छोटा सा पत्थर भी पानी में फेका जाए तो वह जल में लहरों को उत्पन्न करता है. क्या हमारे जीवन में भी इस प्रकार की लहरे बन सकती है या हम हमेसा के लिए एक शांत जल बन गए हैं. जिसमे कोई प्रतिक्रिया नहीं होती.

याद रखिये – लहरें ठहरी हुए स्थिर जल में नहीं बनती वह तो बहती हुई जल में बनती है. स्थिर जल भी बहना चाहता है – ठीक उसी प्रकार हमें भी अपने जीवन में लहरें उत्पन्न करनी है और ऐसा करने के लिए कोई विशेष दिन तिथि मुहूर्त की जरुरत नहीं है.

हम यह सोंच लेते है कि अभी तो बहुत समय है कल कर लेंगें, अभी तो पूरा जीवन पड़ा हुआ है बाद में कर लेंगें

इस प्रकार टालमटोल करके हम अपना ऊर्जा से भरा हुआ अमूल्य समय ऐसे ही गवां देते हैं.

दुनिया में कुछ भी हासिल करने के लिए सबसे पहले अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलना बहुत ही ज्यादा जरुरी है क्योंकि बिना प्रयास किये सफलता नहीं मिलती. मीठे पकवानों का स्वाद लेने के लिए भी उसे पकाना पड़ता है.

वैज्ञानिकों ने एक सर्वेक्षण – जिसमे एक हजार लोगों की जीवन शैली, उनकी कार्यक्षमता का अध्ययन, मस्तिष्क शक्ति का परीक्षण, उनके रहन-सहन पारिवारिक स्थिति व उनके कार्यों के बारें में पूरा अध्ययन किया गया. इस सर्वेक्षण का परिंणाम (result) बहुत ही चौकाने वाला था। 

क्योंकि इस परीक्षण से स्पष्ट हुआ कि मनुष्य अपनी सारी ऊर्जाशक्ति (कार्यक्षमता) का केवल 15 प्रतिशत से 24 प्रतिशत तक ही प्रयोग में करता है

बांकी सारी शक्ति व ऊर्जा को व्यर्थ गवां देता है. और 78 प्रतिशत व्यक्ति जो कार्य अथवा जीवन शैली अपना लेता है उसे छोड़ना ही नहीं चाहता या यूँ कहें कि अपने comfort zone से बाहर निकलना ही नहीं चाहता है.

और अगर थोड़ा बहुत निकलने का प्रयाश भी करते हैं तो नहीं निकल पाते हार मान लेते है अगर उन्हें थोड़ा सा भी परेशानी हुई तो स्वाभाव में चिड़चिड़ापन, अनिद्रा इत्यादि आ जाता है। हालांकि 64 प्रतिशत व्यक्ति जोश में आकर निर्णय तो ले लेते हैं परन्तु उसमे से 12 प्रतिशत लोग ही अपने लक्ष्य के प्रति डटे रहते हैं बांकी हार मान लेते हैं। 

महिलाओं की अपेक्षा पुरुष अपना मानसिक संतुलन ज्यादा खोते हैं उनमे निश्चय-अनिश्चय की भावना ज्यादा होती है। और 71 प्रतिशत व्यक्ति अपने बारे में जीतन नहीं सोचते उतना दूसरों के बारे में सोचते हैं। उनका सारा ऊर्जा खुद को ऊपर उठाने में नहीं बल्कि दूसरों को निचा दिखाने में व्यर्थ चला जाता है। 

अपने आप को पहचाने, आपकी क्षमता क्या है (Identify yourself what is your ability)

अपने आप को पहचानिये और अगर आपके कार्य करने की गति में कुछ कमी है तो उसमे सुधार लाइए, केवल छोटी-छोटी बातों में मत उलझे रहिये अपने लक्ष्य को बड़ा रखिये और उसके लिए कड़ी मेहनत कीजिये.

क्या होता है जब आप छोटी-छोटी लक्ष्य बनाते हो तब आप अपने क्षमता को अच्छी तरह पहचान पाते और ज्यादातर कार्यो को असंभव मान कर उनसे पीछा छुड़ा लेते हो। 

परन्तु अगर आपका लक्ष्य बड़ा रहेगा तब आप उस लेबल तक अपने सोंच को विकसित कर लेते हो और छोटी-छोटी चीजों में उलझे नहीं रहते। बस आपको अपने अंदर की शक्ति को पहचानना है और जब शक्ति का विकास होगा तब आपके क्षमताओं का भी विकास होगा। 

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की आप कहाँ रहते हो या आप कौन से जाती या वर्ग के हो आप छोटे से गांव में रहते हो या बड़े शहर में, अगर आपमें अपने सपने (सपनो का रहस्य) को पूरा करने का हौसला है तब आपको कोई नहीं रोक सकता.

याद रखिये घिसट-घिसट कर तो कहीं भी पंहुचा जा सकता है इसलिए कुछ नया करने का केवल सपना ही मत देखिये बल्कि उस सपने को पूरा भी कीजिये। 

बस बहुत हुआ अब तो जीवन में कुछ करना है (Enough is enough now there is something to do in life)

सबसे पहले शांत दिमाग से सोचें अपने अंदर झांके और आत्मविश्लेषण करें आपको एक राह निश्चित करनी है। और उस पर अमल करना है अर्थात अपना लक्ष्य बनाये और उसको प्राप्त करने के नियमों का पालन करें।

यह आपके लिए बेहतर होगा की आप अपना लक्ष्य अपने इंट्रेस्ट (रूची) की चीजो पर बनाये उदाहरण के लिए मेरा इंट्रेस्ट blogging में है और मै एक blog writer हूँ और आप मेरा blog पोस्ट – “Set your goal – फिर ना कहना कि हम चूक गये” पढ़ रहें है। 

जब भी आप अपना लक्ष्य निर्धारण करते हैं तब आप यह समझ लीजिये कि आपका नया जन्म हुआ है। आप अपने लक्ष्य के प्रति सजग रहिये, उठ खड़े होइए और यह मान लीजिये की आपका एक-एक पल बहुत ही कीमती है

(किसी को पैसा देना तो चल जाता है पर समय नहीं दिया जाता यह बहुत कीमती है क्योंकि पैसे फिर से कमाए जा सकते हैं परन्तु समय दोबारा नहीं लाया जा सकता)। 

याद रखिये जीवन में अवसर या मौका बार-बार नहीं आता इसलिए जो अवसर ही उसे व्यर्थ में मत गवाइए, यह सोचिये की हमें मनुष्य जन्म मिला है तो इसका कोई ना कोई वजह अवश्य है, अपने सोंच की गति सीमा को बढ़ाइए हर चीज को पॉसिटिव रूप में वा क्रिएटिव रूप में देखिये की हम क्या कर सकते हैं या हम क्या नया कर सकते हैं। 

अपना पूजा, साधना चिंतन मनना सब अपने लक्ष्य के प्रति रखों सोते-जगते, उठते-बैठते, खाते-पीते आपका ध्यान लक्ष्य के प्रति होना चाहिए, अपने लक्ष्य के प्रति पागल हो जाइये परन्तु इतना भी नहीं कि बाकि जरुरी व आवश्यक काम को भी भूल जाओ। आपको केवल अपने बेकार के समय (खाली समय) को अपने काम के प्रति या अपने लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में लगाना होगा। 

आपको रास्ता दिखाने वाले हजारों मिलेंगे, मोटिवेट करने वाले भी हजारों मिलेंगे भाषण व प्रवचन देने वाले भी अनेकों मिलेगें परन्तु यह आपके ऊपर है कि आप इस बात को कितना अमल करते हो या अपने लक्ष्य के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हो के नहीं। दुनिया कहने वाली पार्टी है वह बस कहती रह जाएगी परन्तु आप जब तक कुछ करोगे नहीं तब तक कुछ हांसिल होने वाला भी नहीं है।

कभी अपने आप को कमजोर मत समझो (Never consider yourself weak)

लोगों की सबसे बड़ी गन्दी आदत यही होती है कि हम कार्य शुरू करने से पहले ही मानसिक रूप से हार मान लेते हैं, अरे भाई जब अगला किसी कार्य को कर सकता है तो हम क्यों नहीं।

आपके पास उदाहरण के लिए लाखों की संख्या में सफल लोग खड़े है कितनो को तो आप जानते भी हैं, क्या उन्हें सफलता आसानी से मिल गयी या उन्हें ज्यादा मेहनत ही नहीं करनी पड़ी। ऐसा बिल्कुल नहीं है क्योंकि सफलता केवल मेहनत देखती है आपके रंग रूप कद काठी से इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता इसका भी आपको हर क्षेत्र में पहले से ही उदाहरण मौजूद मिल जायेगा।

क्यों कहा गया है – केवल कर्मकर्म करो फल की चिंता मत करो क्योंकि जिस प्रकार हर क्रिया के बदले विपरीत प्रतिक्रिया होती है उसी प्रकार कर्म से फल प्राप्ति होगा ही चाहे वह कर्म बुरे हो या अच्छे। 

अगर आपके आप सभी प्रकार की सुविधाएं हैं या आपका जीवन दूसरों से कुछ बेहतर है तब तो आपको उन व्यक्तियों से कुछ सीखना चाहिए जिनके पास कुछ ना होते हुए भी अपनी मेहनत के दम पर अपनी अलग पहचान बनायीं है वैसे भी जिंदगी का असली मजा आम से खास बनने में है हजारों मुश्किलों को पार कर सफलता प्राप्त करने में बेहत सुकून प्राप्त होता है। 

अपने आप को कमजोर आंकना सबसे बड़ी गलती है इसी एक सोंच के वजह से आप कहाँ से कहाँ तक पहुंच सकते है यह आपको प्रयोग करके देखना चाहिए आप अगर मन में हीन भावना ले आते हो की मै यह नहीं कर पाउँगा तब आप सुरुवात में ही हार जाते हो। पर जब आप ठान लेते हो कि मै क्यों नहीं कर पाउँगा मै अवश्य करूँगा और सफल भी होऊंगा तब ऐसा सोंच कर आधी सफलता आप ऐसे ही प्राप्त कर लेते हो। आप थोड़ा सा तो कोसिस करिये यकीन मानिये गजब का बदलाव आपके अंदर देखने को मिलेगा। 

अपने आराम को त्यागों इससे बाहर निकलो (Gotta get out of your comfort zone)

जब तक आप सुविधा और सुख के चक्कर में फसें रहेंगे तब तक आपको कुछ भी हासिल नहीं होने वाला आपको अपने आराम को त्यागकर एक अलग रास्ते पर चलना होगा।

याद रखिये सोना को भी सुद्ध करने के लिए आग में तपाना पड़ता है। हीरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए उसमे काट-छांट करना पड़ता है। अगर आप चोंट से घबराओगे तो कैसे निखर पाओगे यह समय आपको कष्ट अवश्य देगा परन्तु यह कष्ट बाद में आनंद में भी परिवर्तित होगा। 

अगर आप किसी काम में सफलता पाना चाहते हैं तो उस काम में अपना 100% दीजिये क्योंकि वही आपकी पहचान होती है और अगर आप अपने काम में बेहतर करते है तो काम भी आपका कद्र जरूर करता है।

अंत में यही कहूंगा कि सुरुवात के कष्ट से मत डरो कोसिस तो करों फिर कुछ सालों बाद देखना तब यही सुरुवाती दौरा आपका कष्ट का समय – आपका यादगार समय बन जायेगा और आपको सुकून देगा तो अपनी जिंदगी में set your goal – phir na kehna ki hum chuk gaye रोज एक कदम बढ़ाएं सफलता की ओर। 

अंतिम शब्द 

आशा है की आपको हमारा यह लेख Set your goal – फिर ना कहना कि हम चूक गये (Set your goal in hindi) पसंद आये, अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे share जरूर करें और हमारे Facebook page को जरूर follow करें अगर हमारे लिए कोई सुझाव हो तो comment करें – धन्यवाद 

इन्हे भी पढ़ें डिमांड में हैं 

This Post Has 2 Comments

  1. Abhishek

    बहुत ही अच्छी जानकारी आपने दी है सत्यजीत भाई,
    keep growing 👍

    1. satyajeet singh

      धन्यवाद अभिषेक भाई, यह लेख सुरुवाती दिनों में लिखा गया है. इसलिए इसमें कई गलतियां हैं. परन्तु आपने गलतियों को ना देखते हुए हमारे काम की सराहना की है. इसके लिए आपका बहुत-बहुत आभार

Leave a Reply