मिच्छामी दुक्कड़म क्या है?

What is Michhami Dukkadam Meaning in hindi

जैन धर्म की एक अमूल्य प्रथा जो वाकई में हृदय को स्पर्श करने वाली तथा भावनाओं से ओत-प्रोत है. और वह है “मिच्छामी दुक्कड़म (michhami dukkadam)” अर्थात क्षमा कीजिये……. क्षमा किनसे, क्षमा प्रत्येक उस जीव से जो इस दुनिया में मौजूद है.

इस लेख के माध्यम से michhami dukkadam meaning in hindi को पूरी तरह समझें –

मिच्छामी दुक्कड़म क्या है? – what is michhami dukkadam

मिच्छामी दुक्कड़म का हिंदी अर्थ होता है – क्षमा करें, जिसमे

  • मिच्छामी = क्षमा
  • दुक्कड़म = बुरे कर्मों के लिए

मनुष्य अपने जीवन में गलतियां करता ही रहता है चाहे वह गलतियां जानबूझ किया गया हो या अनजाने में क्योंकि कई-कई बार हमें पता नहीं होता और हम जाने अनजाने लोगों का नुकशान कर बैठते हैं या उनका दिल दुःखा देते हैं.

ऐसा करने में पश्चात हमें लगता है कि हाँ हमसे गलती हुई है. परन्तु हम उसे उतना अहमियत नहीं देते मन किया तो हम sorry बोल लेते हैं नहीं तो उस चीज की पछतावा भी नहीं करते.

गलतियां करना और सॉरी बोलना हमारे लिए आम हो गया है यह हमारे रोजमर्रा के जीवन में शामिल है.

Micchami-Dukkadam

मिच्छामी दुक्कड़म और सॉरी में क्या अंतर है?

जैसा की मैने बताया सॉरी हमारे लिए बिल्कुल आम हो चूका है हमने इसे अपने आदत में शामिल कर लिया है कि गलतियां करना है और सॉरी बोलना है. इस सॉरी में कोई भावना या फील नहीं है.

आज यह केवल एक शब्द बनकर रह चूका है.

परन्तु “मिच्छामी दुक्कड़म” ऐसा नहीं है इसमें हृदय को छू लेने वाली भावनाए है. यह अपने आप में एक पर्व है. “मिच्छामी दुक्कड़म” केवल किसी अकेले व्यक्ति के लिए नहीं बल्कि पुरे संसार के लिए तथा जाने अनजाने में स्वयं के वजह से जिस किसी का दिल दुःखा उसके लिए ह्रदय से किया गया क्षमा का अनुरोध है.

यह एक दिन के लिए विशेष त्यौहार है जिसमे स्वयं के कार्यों से स्वयं को जो हानि हुई है उसके लिए स्वयं से माफ़ी मांगकर शरीर में नवऊर्जा विकसित करना होता है.

मिच्छामि दुक्कडम और पर्युषण पर्व

पर्युषण पर्व जैन धर्म में एक विशेष पर्व है. जो भाद्रपद के पहले और दूसरे सप्ताह में मनाया जाता है. इस पर्व को स्वेताम्बर जैन 8 दिन तक तथा दिगंबर जैन 10 दिन तक मानते हैं.

इस पर्व को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है इस दौरान लोग –

  • पूजा
  • अर्चना
  • आरती
  • समागम
  • त्याग
  • तपस्या
  • उपवास

इत्यादि क्रिया करते हुए अपना समय गुजारते हैं.

पर्युषण पर्व के अंतिम दिन को क्षमावाणी दिवस के रूप में मनाया जाता है. जिसमे अपने मन, वचन, काया व हृदय की गहराई से हर किसी से क्षमा माँगा जाता है.

मिच्छामी दुक्कड़म का महत्व

मिच्छामी दुक्कड़म का जैन धर्म में प्राचीन महत्व है. यह एक आसान क्रिया बिल्कुल भी नहीं है – अपनी गलतियों के लिए किसी से माफ़ी मांगना और किसी की गलतियों के लिए उसे माफ़ कर पाना यह हमारे लिए बहुत ही मुश्किल काम है.

किसी से माफी मांगना अर्थात हमारे अहम को ठेस पहुंचना है. इसी प्रकार की हमारी मानसिकता रही है.

परन्तु दूसरों को दुःख पहुँचाना भी एक पाप है और ऐसी मान्यता के साथ “मिच्छामी दुक्कड़म” हृदय से निकला हुआ वह भाव है जो पश्चाताप के साथ भविष्य में वह गलती दोबारा ना दोहराने का विचार मन में प्रज्वलित करता है.

—–***—–

खामेमि सव्वे जीवा, सव्वे जीवा खमंतु मे।

मित्तिमे सव्व भुएस्‌ वैरं ममझं न केणई।

भगवान महावीर

अर्थात ……

– सभी प्राणियों से मेरी मित्रता है. किसी से भी मेरा कोई बैर (दुश्मनी) नहीं।।

Michhami Dukkadam 2022 Date?

September 1, Thursday

What is the date of Paryushan in 2022?

August 24, 2022 to September 1, 2022

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आखिर में – उम्मीद है हमारा यह लेख – मिच्छामी दुक्कड़म क्या है (michhami dukkadam meaning in hindi) आपके लिए उपयोगी रहा हो.

इस लेख को दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ अवश्य शेयर करें – ताकि वे भी इस पवित्र विचार का अनुसरण कर सके.

अंत में सिर्फ इतना कहूंगा …. मेरे द्वारा हुए किसी भी गलती के लिए “मिच्छामी दुक्कड़म” (michhami dukkadam) कृपया क्षमा करें – धन्यवाद.

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