कम्प्यूटर क्या है? सम्पूर्ण विश्लेषण | what is computer in hindi.

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computer in hindi

आजकल हर जगह कम्प्यूटर विद्यमान है, कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो Computer के बारे में नहीं जानता हो कि..कम्प्यूटर क्या है (what is computer in hindi) आप किसी से भी यह सवाल पूछ लो की कंप्यूटर क्या है? उसके पास कुछ ना कुछ शब्द जरूर होगा कम्यूटर के विषय में कहने को।

इस धरती पर रहने वाला कोई भी व्यक्ति कंप्यूटर के अस्तित्व को नकार नहीं सकता। आपने जब किसी स्टोर से सामान लिया होगा तो देखा ही होगा, एक बार कोड रीडर आपके द्धारा ख़रीदे गए सामान पर बने बार कोड को जाँचता है और एक computer से जुड़ा हुआ प्रिंटर आपको बिल बनाकर देता है।

क्या आप जानते है की एक बक्से के सामान दिखने वाली मशीन हमारी पूरी जीवन सैली बदल चुकी है। पोस्ट कार्ड का स्थान email ने ले लिया है, टिकट लेना, बैंकिंग के कार्य इन सब ने एक नया रूप ले लिया है।

सब काम इतना आसान हो गया है मानो कोई जादुई शक्ति आदेश दे रहा हो, और सभी कार्य होता जा रहा हो। इसलिए हमारा भी फर्ज बनता है की हमारे जीवन को इतना सरल बनाने वाले दिव्य संरचना computer के बारे में छोटे-बड़े सभी बातों को जानें, तो आइये इस आर्टिकल में कम्प्यूटर क्या है (computer in hindi) के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं।

कम्प्यूटर क्या है (what is computer in hindi) 

सरल भाषा में कहा जाए तो कम्प्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक यंत्र (machine) या है जो तार्किक और अंकगणितीय क्रियाओं को संपन्न करता है। कम्प्यूटर हमारे द्धारा दिए गए निर्देशों का पालन वा गणना करता है।

आज के समय में कम्प्यूटर का उपयोग हर क्षेत्र में इतना बढ़ चूका है की इसके बिना सारा काम अधूरा है। पहले के computer कमरे के जितने बड़े आकर के हुआ करते थे, जो आजकल के सैकड़ो पर्सनल कंप्यूटरों के जितना ऊर्जा का खपत करते थे।

पर आज के time पे ऐसा नहीं है अब computer के रूप में इतना परिवर्तन हो गया है की उसे कलाई में पहना जा सकता है। छोटी सी बैटरी से संचालित किया जा सकता है। Embedded भी एक प्रचलित computer है जिसका उपयोग प्रायः मशीनों को कण्ट्रोल करने में किया जाता है उदाहरण के लिए लड़ाकू विमान से लेकर रोबोट, डिजिटल कैमरा व बच्चो के खिलौनों में भी देखा जा सकता है।

कम्प्यूटर का विकास – कम्प्यूटर का इतिहास – history of computer in hindi

ऐबाकस कम्प्यूटर (The Abacus)

Computer का इतिहास लगभग 3000 वर्ष पुराना है जब चीन में एक गणना यंत्र ‘एबाकस’ का आविष्कार हुआ। यह एक यान्त्रिक डिवाइस (Machanical device) है, जो आज भी चीन जापान सहित एशिया की अनेक देशों में अंकों की गड़ना के लिए काम आती है। एबाकस जोड़ने वाली मशीनो (Adding Machines) तथा computer के लिए आधार सिला थी।

ऐबाकस तारों (wires) का एक फ्रेम होता है। इन तारों में बीड (पक्की मिट्टी के गोल टुकड़े इनमे छेद हो) पिरोये रहते है। सुरुवात में एबाकस को व्यापारी गणना करने के काम में उपयोग किया करते थे। यह मसिनी अंकों के जोड़, घटाव, गुणा, भाग आदि कार्य करने के काम आती है।

अलग-अलग सताब्दियों बाद अनेक यांत्रिक मसीने गणना के लिए विकशित की गयी। सत्रहवीं सताब्दी में फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल (Blaize Pascal) ने एक डिजिटल गणना यंत्र (Meehanical digital calculator) सन उन्नीस सौ पैतालिश में विकशित किया। इस मशीन को (Adding machine) कहते थे, क्योकि सी सिर्फ जोड़, घटाव ही कर सकती थी।

यह मशीन घडी (Watch) और ओड़ोमीटर (odometer) के सिद्धांत पर कार्य करती थी। इसके कई दांते दार चकरिया (Toothed wheels) थी जो घूमते रहती थी। चकरियों के दांतो (teeth) पर 0 से 9 तक के अंक छपे रहते थे। प्रत्येक चकरी (wheel) का एक स्थानीय मान (Positional/Place value) जैसे इकाई, दहाई, सैकड़ा आदि था।   

इसके प्रत्येक चकरी स्वयं से पिछली चकरी के एक चक्कर लगाने पे एक अंक घूमती थी ब्लेज पास्कल के इस एडिंग मशीन (adding machine) को पास्कलाइन (pascaline) कहते है जो सबसे पहले यांत्रिकीय गणना-यंत्र (Mechanical calculating machine) था, जिसका उपयोग आज भी स्कूटर व कार के स्पीडोमीटर (speedometer) के रूप में होता है।     

सन सोलह सौ चौरानवे में जर्मन गणितज्ञ व दार्शनिक Gottfried wilhelm von leibnitz ने पास्कलाइन का विकशित रूप तैयार किया जिसे रेकनिग मशीन (Reckoning machine) या लेबनीज़ चक्र (leibnitz wheel) कहते है

यह मशीन अंको के जोड़ घटाव के साथ-साथ गुणा व भाग भी करती है। इसके पश्चात, इसी तरह एक यांत्रिक गणना-यंत्र एरिथ्मोंमीटर (Arithmometer) थॉमस डे कॉल्मर (Thomas de colmar) ने उन्नीस सौ अस्सी में बनाया था। 

जेकार्ड्स लूम (Jacquards loom)

सन अठारह सौ एक में फ्रांसीसी बुनकर जोसेफ जेकार्ड (Joseph jacquard) ने कपडे बुनने के ऐसे लूम का आविष्कार किया जो कपड़ो की डिज़ाइन व पैटर्न खुद ही देता था, इस loom की विशेसता यह था की यह कपडे के पैटर्न को कार्डबोर्ड के छेदयुक्त पंचकार्डी से नियंत्रित करता था। पंचकार्डो में की उपस्थिति व अनुपस्थिति द्धारा धागो को निर्देशित किया जाता था।   

जेकार्ड के इस loom द्धारा दो विचारधाराएं प्रस्तुत की गयी जो आगे computer के विकाश में उपयोगी सिद्ध हुई। जिसमे पहला यह था की सुचना को पंचकार्ड पर कोडेड किया जा सकता है

और दूसरी विचारधारा यह थी की पंचकार्ड पर संग्रहित सुचना निर्देशों का समूह है जिससे पंचकार्ड को जब भी काम में लिया जाएगा तो निर्देशों का यह समूह एक प्रोग्राम (program) के रूप में करेगा। 

चार्ल्स बैवेज और उनकी इंजन (Charles Babbage and his Engines)

आप जानते है की Computer के इतिहास में उन्नीसवीं सताब्दी के प्रारंभिक समय को स्वर्णिम युग माना जाता है, अंग्रेजी गणितज्ञ चार्ल्स बैवेज (Charles Babbage) ने गणना के लिए बनी हुई सारणियों में त्रुटि को देखते हुए एक यांत्रिक गणना मशीन विकशित करने की आवश्यकता समझी। क्योकि यह मशीने हाँथ से बनाई गयी थी इसलिए इसमें अनेक त्रुटि आ जाती थी।   

चार्ल्स बैवेज ने सन अठारह सौ बाइश में एक मशीन का निर्माण किया जिसका खर्चा ब्रिटश सरकार ने उठाया था, उस मशीन का नाम डिफरेंस इंजिन रखा गया, जो भाप से चलती थी और इसमें गेयर व सॉफ्ट लगे हुए थे।   

इसके बाद अठारह सौ तैतीस में चार्ल्स बैवेज ने डिफ़रेंस इंजिन को नया रूप दिया यह एक सक्तिसाली मशीन था इसको एनालिटिकल इंजिन (Analytical Engine) नाम दिया गया। यह मशीन कई प्रकार के गणना कार्य करने में सक्षम थी, पचकार्डो पर संग्रहित निर्देशो के अनुसार कार्य करने में सक्षम थी।

बैवेज का computer के विकाश में बहुत बड़ा योगदान रहा। बैवेज का एनालिटिक इंजिन आधुनिक कम्प्यूटर का आधार बना इसी कारण चार्ल्स बैवेज को computer का जनक (Father of Computer) कहा जाता है। 

एडा ऑगस्टा (Ada Augusta)

चार्ल्स बैवेज के एनालिटिक इंजिन को शुरू में बेकार समझा गया, और उसकी कमियां निकाली गयी, जिससे चार्ल्स बैवेज को बहुत निराशा हुई परन्तु अप्रत्यासित रूप से एडा ऑगस्टा जो की प्रसिद्ध इंग्लिश कवि लॉर्ड बायरन (lord Byron) की पुत्री थी, ने बैवेज के उस एनालिटिकल इंजिन में Computation instructions विकसित करने में मदद की। जिस प्रकार चार्ल्स बैवेज को computer विज्ञान का जनक होने का गौरव प्राप्त है

उसी प्रकार विश्व की पहली प्रोग्रामर होने का श्रेय एडा ऑगस्टा को जाता है। ऑगस्टा को सम्मान देने के लिए एक प्रोग्राम भाषा का नाम एडा रखा गया।

हर्मन होलेरिथ (Herman Hollerith)

सन अठारह सौ नव्वे में computer के इतिहास में अमेरिका की जनगणना का कार्य एक महत्वपूर्ण घटना थी। सन अठारह सौ नव्वे से पहले जनगणना कार्य पारम्परिक तरीके से किया जाता था, सन अठारह सौ अस्सी में सुरु की गयी जनगणना में 7 साल का समय लगा था।

कम समय में जनगणना करने के लिए herman hollerith ने एक मशीन बनाई जिसमे पंचकार्डो को विधुत द्धारा संचालित किया गया, इस मशीन की मदद से 3 वर्ष में ही जनगणना हो गया।

सन 1896 में हॉलेरिथ ने पंचकार्ड यंत्र बनाने की एक company टेबुलेटिंग मशीन कम्पनी (Tabulating machine company) स्थापित की। सन 1911 में इस company का अन्य कंपनी के साथ विलय हुआ फिर इसका नाम बदलकर ‘Computer Tabulating Recording Company’ हो गया।

सन 1924 में इस कंपनी का नाम फिर से बदल दिया गया और इंटरनेशनल बिजनेश मशीन (International Business machine) हो गया। जो आज के समय में कम्प्यूटर निर्माण में अग्रणीय company है। 

डाक्टर हॉवर्ड आईकेन और मार्क-I (Dr. Howard Aiken and the Mark-I)

सन 1940 में विधुत-यांत्रिक computing शिखर पर पहुंच चुकी थी। आई. बी. एम. (IBM) के चार शीर्ष इंजीनियरों व डाक्टर हावर्ड आईकेन ने 1944 में एक मशीन को विकशित किया

यह विश्व का सबसे पहला विधुत यांत्रिक कम्प्यूटर था इसका नाम आटोमेटिक सीक्वेंस कंट्रोल्ड केल्कुलेटर (Automatic sequence controlled calculator) रखा गया।

इसे हॉवर्ड विश्वविद्यालय को सन 1944 के फरवरी महीने में भेजा गया जो विश्वविद्यालय को 7 अगस्त 1944 को प्राप्त हुआ, इसी विश्वविद्यालय में इसका नाम मार्क-I पड़ा। 

मार्क-I में 500 मिल लम्बाई के तार व 30 लाख विधुत संयोजन (Connections) थे, यह 6 सेकेण्ड में एक गुणा (multiplication) और 12 सेकेंड में एक भाग (Division) की क्रिया कर सकता था।   

19 वी सताब्दी के चौथे दशक के मध्य में इलेक्ट्रॉनिक अवधारणाएँ तेज़ी से बढ़ रही थी, इससे computer भी अछूते नहीं थे आई. बी. एम. मार्क-I इलेक्ट्रॉनिक टेक्नोलॉजी आने के साथ ही पुराना हो गया,

इस technology में केवल विधुत धारा द्धारा निर्मित संकेत ही आवस्यकताओं को प्रोसेस करते थे तथा इन प्रद्योगिकी पर आधारित डिवाइसेज़ में किसी movable पुर्जे की आवस्यकता नहीं थी।

एटानासोफ बेरी कम्प्यूटर (The Atanasoff-Berry Computer in hindi)

सन 1945 में एटानासोफ और क्लीफर्ड बेरी ने एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन को विकशित किया जिसका नाम ए. बी. सी. (ABC) रखा गया जिसमे ABC (Atanasoff-berry computer) का संक्षिप्त रूप है यह सबसे पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल computer था। 

डिजिटल अवधारणा (concepts) तब भी वही थी जब मशीने यांत्रिक (mechanical) या विधुत-यांत्रिक (Electro-mechanical) होती थी 1935 में कोनार्ड जयुज (Konard-zuse) जो जर्मन थे ने पहला डिजिटल computer द्विधारी अंकगणित तथा प्रोग्राम नियंत्रण का प्रयोग कर बनाया।

इसका नाम जेड प्रथम (Z-1) था, यह एक यांत्रिक मशीन थी। बाद में इन्होंने एक मशीन जेड द्वितीय (Z-2) बनाई जिसमे उन्होंने विधुत चुम्बकीय रिलेज का प्रयोग किया। 

1945-46 के दौरान, जान विलियम मुचली (John william mauchly) तथा जे.पी. एकर्ट (j,p.eckert) ने सबसे पहले सामान्य उद्देश्यी computer (General Purpose Computer) का विकाश पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय (University of pennsylvania) में किया जिसका नाम एनिएक (ENIAC) रखा गया जिसका पूर्ण रूप Electronic Numeric Integrator And Computer है। 

computer फैक्ट्स पर नजर डालते है – कम्प्यूटर क्या है ?

  • कंप्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक यंत्र (machine) है जो अंकगणित और तार्किक क्रिया-कलापों को साथ-साथ संपन्न करती है। 
  • कंप्यूटर की क्षमताओं में गति, सुधता, स्वचालन, सार्वभौमिकता, उच्च संग्रहण क्षमता, कर्मठता और विश्वनीयता का समावेश है। 
  • कंप्यूटर की कमियों में सामान्य बोध और आत्मरक्षा की कमी है। 
  • इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रांसफर एक ऐसी सुविधा है जिससे आप घर बैठे बैंकों से रूपये का लेन-देन कर सकते है। 
  • कंप्यूटर के इतिहास में उनीसवीं शताब्दी का प्रारंभिक समय स्वर्णिम युग माना जाता है। 
  • चार्ल्स बैवेज ने सन 1822 में एक मशीन “डिफरेन्स इंजिन” का निर्माण किया। 
  • डिफरेन्स इंजिन को बाद में परिवर्ती कर एनालिटिकल इंजिन के रूप में नया नाम दिया गया। 
  • सन 1896 में हॉलेरिथ ने पंचकार्ड बनाने एक कम्पनी टेबुलेटिंग मशीन कंपनी स्थापित की। 
  • एबीसी का तात्पर्य एटानासोफ बेरी computer से है। 

आखिर कम्प्यूटर (computer) साक्षरता की आवश्यकता क्यों –

कम्प्यूटर को जानना आवश्यक क्यों है ? क्या यह सिर्फ एक उद्योग को स्थापित करने की कोसिस है। या फिर कंप्यूटर आज वाकई इतना महत्वपूर्ण बन गया है की इसको भली-भाति जानना आवश्यक है।

इससे पहले की आप इससे इसका जवाब ढूंढे इस लेख कम्प्यूटर क्या है? – what is computer in hindi. पर गौर करें और अपने चारो तरफ computer से होने वाले कार्यो और उसके अनुप्रयोगों पे नजर डालें आपको जवाब मिल जाएगा, फिर आप ही बताइये की आपके लिए computer साक्षर होना आवश्यक है की नहीं 

दोस्तों याद रखिये – आपके पास निर्णय लेने लिए केवल एक दिमाग नहीं, बल्कि विश्व के सबसे अच्छे दिमागों का संकलन COMPUTER की सहायता से उपलब्ध होता है। इस तंत्र को Experts system कहते है। 

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अंतिम शब्द 

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