Summer health tips : गर्मियों के मौसम में अपना ख्याल कैसे रखें?

Summer health tips hindi : मौसम के बदलने से शरीर पर इसका पूरा-पूरा प्रभाव पड़ता है. तो इस गर्मी के मौसम में आपका हाल बेहाल न हो और शरीर को मौसम के अनुसार ढाल कर गर्मी का पूरा आनंद लिया जाये इस प्रकार के स्वास्थ्य टिप्स के साथ हम एक बार फिर उपस्थित हैं.

गर्मी के मौसम में में ठंडा-ठंडा कुल-कुल रहिये और स्वस्थ व आनंद से भर जाइये वह कैसे चलिए इस लेख गर्मियों के मौसम में अपना ख्याल कैसे रखें, ग्रीष्म ऋतू के लिए कुछ टिप्स व घरेलु नुस्खे (Summer health tips) को जानते है.

ज्यादातर लोग थोड़ा सा भी तापमान बढ़ने गर्मी से व्याकुल होने लगते है और वही कुछ लोग एसे भी होते है जो गर्मी का पारा 44 डिग्री सेल्शियस बढ़ जाये तब भी कुल रहते हैं और आसानी से गर्मी झेल लेते है. जबकि गर्मी तो सभी के लिए एक सामान पड़ती है. फिर क्यों कुछ लोग गर्मी के मौसम में व्याकुल नहीं होते? ऐसा क्यों? क्या उनके पास गर्मी से बचने के लिए कोई विशेष शुत्र होता है?

विषय-सूची

गर्मी और शरीर में पड़ने वाले प्रभावों को ऐसे समझें?

क्या आप जानते हैं? आयुर्वेद के अनुसार शरीर वात, पित्त, कफ तत्त्वों से निर्मित है –

  1. वात – हमारे शरीर में वात उन सभी क्रियाओं को नियंत्रित करता है जिसके द्धारा हमारे शरीर में वायु का आगमन होता है, जैसे श्वासन क्रिया, हृदय की धड़कन, भोजन का उत्सर्जन, पलकों का झपकना इत्यादि। 
  2. पित्त – पित्त हमारे शरीर में मेटाबोल्जिम मतलब भोजन को ऊर्जा में बदलने की क्रिया को निर्धारित करता है और शरीर में तापमान को नियंत्रित करता है। 
  3. कफ – कफ हमारे शरीर में जल, पानी की मात्रा को नियंत्रित करता है। और त्वचा में नमी बनाये रखने के लिए सहयोग करता है यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बनाए रखता है.

ये तीनो दोष हमारे शरीर में अलग-अलग मात्रा में मौजूद होते है और जिस भी दोष का मात्रा अधिक होता है उसके अनुरूप हमारी प्रकृति वात, पित्त व कफ में वर्गीकृत की जा सकती है.

वात, पित्त और कफ वाले व्यक्ति गर्मियों के मौसम में अपना ख्याल कैसे रखें?

गर्मी (ग्रीष्म) में वात प्रकृति वाले ऐसे रखें अपना ख्याल

वात प्रकृति के लोगों का शरीर हल्का होता है और उनमे ऊर्जा का तीव्र गति से प्रवाह होता है पर वात प्रकृति वालों की एक समस्या यह है कि वे खुद को जल्दी थका देते है उनकी नींद अच्छे से पूरी नहीं होती और पाचन शक्ति थोड़ी कमजोर होती है. त्वचा और बाल कुछ रूखे हुए होते है, और हाँथ पाँव ठंडे होते है.

इन्हे अत्यधिक चिंता करने की आदत होती है. नए-नए जगहों पर जाना नए लोगों से मिलना इन्हे खूब भाता है. इनकी प्रकृति Creativity वाली होती है और ये किसी भी नई चीज़ों को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित रहते है.

अगर आप वातज/वात प्रकृति के है तो गर्मियों के लिए आपकी lifestyle में इन बदलाव को अवश्य शामिल करें। खासकर जब आप 50-55 वर्ष के हो क्योकि जीवन के इस उम्र में वात प्रबल हो जाता है, बढ़ा हुआ तापमान वात प्रकृति वाले लोगों के शरीर से जल की मात्रा को शीघ्रता से कम कर देता है. जिसके वजह से शरीर में जलन, आँखों में जलन, अधिक व्याकुल कर देती है.

होठ और नाक भी सूखे-सूखे रहते है. पर तेल मालिश और नाक में तेल की बुँदे डालना आदि से विशेष लाभ होता है. सूखे नाक के लिए आप बादाम का तेल या सुद्ध घी की कुछ बुँदे नाक में डाल सकते है। साथ ही भोजन में विशेष ध्यान देना चाहिए जैसे पौस्टिक भोजन, हरी-हरी सब्जिया, अनाज मूंगदाल, घी का सेवन करें और सही समय पे करें। 

गर्मी में मौसम में स्वस्थ रहने के लिए खान पान में निम्न बदलाव करें?

  • खाने में ठंढे, रसयुक्त फल जैसे तरबूज, खरबूज इत्यादि का सेवन करें।
  • सूखे मेवे का सेवन कम करे। 
  • रूखे-सूखे खाने की सामान जैसे बाजार कि नमकीन इत्यादि न खाए। इससे आपको कब्ज की समस्या हो सकती है। 
  • आयुर्वेद के अनुसार नैसर्गिक रूप से मीठा खाने से वात संतुलित रहता है और गर्मी में आपकी ऊर्जा बरक़रार रहता है। 
  • गर्मी के मौसम में दूध, दही, खजूर, छुहारे, बादाम व किसमिस और शहद थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाएं। जैसे निम्बू पानी बना रहें हो तो उसमे शहद मिला लें 
  • अगर कुछ छूट-पूट खाने का मन हो तो किसमिस बादाम, खजूर के दो चार दाने ले लें। मगर आप डायबिटीज के मरीज है तो, खजूर किसमिस नहीं खाये। 
  • सेंधा नमक का प्रयोग वातज लोगों के लिए बहुत लाभदायी होता है। 
Summer health tips in hindi

गर्मी के मौसम (Summer health tips) में जीवन शैली (Lifestyle) में बदलाव करें और स्वस्थ रहें?

  • गर्मियों में आपको खुले मैदान में योगाभ्यास करना चाहिए। 
  • योगा, ध्यान, प्राणायाम इत्यादि करना चाहिए। 
  • शवासन करें यह मन को शांत रखता है। 
  • गर्मी का मौसम व्यक्ति को उत्तेजित करता है, इसलिए अपने भावनाओं को नियंत्रित रखना चाहिए। 

पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति गर्मी के मौसम में ऐसे स्वस्थ रहें?

पित्त का मतलब अग्नि से होता है शरीर में जहां भी अग्नि है जैसे जठराग्नि (खाना पचाने की अग्नि) जिसे भूख भी कहा जाता है सरल शब्दों में कहें तो पित्त वे तत्व जिनके पीछे एसिड लगा हुआ है. जैसे हाइड्रोक्लोरिक एसिड भोजन पचाने का अम्ल, उसमे पित्त कार्य करता है. आपने सुना होगा जब कई बार जब व्यक्ति अत्यधिक गुस्सा होता है. तो बड़े बुजुर्गों द्धारा कहा जाता है कि इस पर पित्त चढ़ गया है.

पित प्रकृति के लोगों की पाचन सक्ति मजबूत होती है, परन्तु इनको गुस्सा बहुत ही जल्दी आ जाता है इनका शरीर थोड़ा गर्म होता है और त्वचा या चेहरे में एक क्रांति होती है। इन्हे गर्मियों में त्वचा सम्बन्धी समस्याएं, भूख न लगना, भोजन का न पचना, एसिडिटी जैसी समस्याएं अत्यधिक होती है. गर्मी आपको व्याकुल करेगी, क्योकि आपमें पित्त की प्रधानता है और गर्मी पित्त वर्धक मौसम है.

पित्त प्रकृति वालों के लिए गर्मी के मौसम में खान-पान में बदलाव

  • अगर आप पित्त प्रमुख वाले व्यक्ति है तो गर्मी के मौसम में भारी खाना जैसे – तेल व घी से बने खाद्य पदार्थो के सेवन से बचें। 
  • आपको हल्का खाना, खाना चाहिए जो गर्मी के ऋतू में आसानी से पच जाए जैसे – बासमती चावल, मूंगदाल व कम तेल में बनाई गयी हरी सब्जिया इत्यादि। 
  • छाछ, आम, बेल का शर्बत का सेवन करना लाभदायक होगा। 
  • कसैलापन वाली सब्जियां जैसे – अनार, जामुन, तोरोइ और करेला आदि। 
  • मीठे में आप खजूर, नारियल, दूध से बने खाद्य पदार्थ आदि का सेवन करें। 
  • धुप में बार-बार जाने से बचें क्योकि लू लगने की संभावनाएं अत्यधिक होती है। 

पित्त प्रकृति वाले गर्मी के मौसम में जीवन शैली (Lifestyle) में निम्न बदलाव करें

प्राणायाम व्याम करना चाहिए, खास करके नाड़ी सोधन प्राणायाम और शीतल प्राणायाम

नाड़ी सोधन प्राणायाम

सबसे पहले आप ध्यान से सुविधाजनक किसी आसन पर बैठ जाए। व सिर और मेरुदण्ड को सीधा रखें, पुरे शरीर को सिथिल करके आँखों को बंद कर ले। फीर दाहिने हाँथ कि उँगलियों को मुँह के सामने लाए। तर्जनी और मध्यमा को धीरे से भूमध्य पर रखें। अंगूठा को दाहिने नासिका छिद्र के ऊपर और अनामिका ऊँगली बाए नाशिका छिद्र के ऊपर रहे। अंगूठे से दाहिने नाशिका को बंद करें।

फीर बायीं नासिका से 5 बार श्वास लें और छोड़ें। श्वास छोड़ने व अंदर लेने की गति को सामान्य रखे। 5 बार यह करने के पश्चात दाहिने नाशिका से अंगूठा हटा ले और बायीं नाशिका को अनामिका से दबा कर श्वास-प्रवाह को रोकें। श्वास प्रवाह की गति को सामान्य रखते हुए दाहिने नाशिका से 5 बार श्वास ले और छोड़ें। कम से कम 5 मिनट तक यह अभ्यास करें।

गर्मी से बचने के लिए शीतल प्राणायाम करें

किसी आरामदायक आसन पर बैठे, और हांथो को ज्ञान मुद्रा में घुटनों पर रखें। आँखों को बंद करके पुरे शरीर को सिथिल करें। अपने जीभ को जितना हो सके बिना किसी तनाव से मुँह से बाहर ले आयें।

जीभ के दोनों किनारों को इस प्रकार मोड़ें कि वह एक नाली के सामान दिखाई दे और इसी नली के द्धारा श्वास अंदर खीचें। अंत में जीभ अंदर कर लें और मुँह को बंद कर लें। यह क्रिया 8, 9 बार करें और धीरे-धीरे इस प्राणायाम की क्रिया को बढ़ाए। 

याद रखिये की इस शीतल प्राणायाम का अभ्यास प्रदूषित वातावरण व ठंढ के मौसम में न करें। नासिका, श्वसन द्धारा अंदर ली जाने वाली वायु को नाजुक फेफड़ों में प्रवेश के पूर्व गर्म व स्वस्छ बनाती है। और मुँह द्धारा श्वास लेने पर वातानुकूल की यह क्रिया नहीं हो पाती और ठंढी एवं दूषित वायु का फेफड़ों में प्रवेश हानिकारक हो सकता है। 

कफ प्रकृति वाले लोग गर्मी के मौसम में अपना ख्याल कैसे रखें?

कफ-दोष प्रधान वाले व्यक्ति में जल की मात्रा अधिक होती है। ऐसे व्यक्तियों में ऊर्जा (stamina) की मात्रा अत्यधिक होती है। ये कठिन, मुश्किल परिस्थिति में भी जल्दी से विचलित नहीं होते और इनका मन शांत रहता है। इन्हे नींद अच्छी आती है। बाल घने व आँख बड़ी और गहरी होती है। ये दैनिक दिनचर्या के पाबंद होते है। इनका दिमाग ठण्डा होता है इसलिए इन्हे रोग, दुःख जल्दी से ग्रस्त नहीं करते।

गर्मी के मौसम कफ प्रवृति वाले लोग के लिए अच्छा होता है, यह अग्नि बढ़ाने वाला मौसम होता है। और कफज में जल की मात्रा अधिक होती है। इसलिए दोनों का मेल इसे बराबर रखता है। ग्रीष्म ऋतू अर्थात गर्मी में इनकी जठराग्नि प्रदीप्त हो जाती है, अर्थात इन्हे भूख अधिक लगने लगती है। 

गर्मी में मौसम में कफ प्रकृति वालों का खान-पान में बदलाव – मसालों में काली मिर्च, मेथी और अजवाइन का संतुलित मात्रा में प्रयोग करें। साथ ही कच्चा प्याज, तोरोइ, अनाज, और अदरक अवश्य सेवन करें। 

गर्मियों के मौसम में लाइफस्टाइल में करे यह बदलाव

गर्मी के मौसम से बचने व गर्मी भगाने के कुछ उपाय

  1. गर्मियों में बेल का शर्बत, छाछ, आम का रस आदि पिए और मसालों में मेथी, अजवाइन, जीरा व सेंधा नमक का प्रयोग करना चाहिए। गर्म मशाला का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 
  2. ठण्डा वाले स्थान जैसे ए.सी वाले कमरे आदि से अचानक ही निकलकर खुले में काम करने नहीं जाना चाहिए। नहीं तो सिर दर्द बदन दर्द हो सकता है। 
  3. कसैला खाना जैसे प्याज, जामुन, तरोई, करेला और सीताफल का सेवन अवश्य करें। 
  4. खाना खाते समय ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। क्योकि इससे भोजन को पचाने वाला अम्ल कमजोर हो जाता है, और भूख मर जाएगी, पेट फूलने लगेगा, जिसके कारण शरीर में अम्ल की मात्रा बढ़ जाएगी और जकड़न होने लगेगी। 
  5. अगर आपको नींद नहीं आ रहा है तो समझ जाइये की शरीर में वात तत्व हावी हो रहा है। ऐसे में तेल मालिश कराएं, पौष्टिक द्रव्य जैसे टमाटर का सुप, मूंगदाल की पानी और घी की छौंक लगी सब्जियों आदि का सेवन करना चाहिए यह वात को बैलेंस करता है। 
  6. अगर आंखों में जलन हो तो, एक गिलास पानी में एक चम्मच त्रिफला पावडर मिलाकर छान ले और इससे आँखों को धोये। 
  7. शारीरिक श्रम हो या मानशिक श्रम जरुरत से ज्यादा न करें क्योकि इससे तनाव पैदा होता है जो ठीक नहीं हैं। 
  8. होठ सूखने या फटने जैसी समस्या हो तो होठों पर देसी घी लगाए। 
  9. कब्ज की शिकायत हो तो त्रिफला जल पिये। 
  10. धुप में आना-जाना करते हैं तो आम पन्ना, बेल रस जरूर पिये। 

गर्मी में ज्यादातर हरी सब्जियों का प्रयोग करें व मौसमी फल खाये। और हाँ गर्मियों में चन्दन या मुल्तानी मिट्टी का लेप जरूर लगाए क्योकि यह शरीर को ठंडा रखता है। और गर्मियों का जमकर आनंद ले.

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आखिर में

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