भारत का राष्ट्रीय वृक्ष – बरगद | National tree of india in hindi

National tree of india in hindi : प्रायः प्रायः बरगद वृक्ष के बारे में सभी लोग जानते हैं. चाहे व्यक्ति गांव, कस्बे, शहर कहीं का भी हो क्योंकि यह एक ऐसा वृक्ष है. जो लगभग सभी स्थानों में पाया जाता है.

even… बरगद वृक्ष को गली के चौक चौराहे से लेकर घने जंगलों, नदी किनारों, खेत-खारों इत्यादि जगह पर प्राप्त किया जा सकता है. इस लेख – भारत का राष्ट्रीय वृक्ष, बरगद (National tree of india in hindi) के माध्यम से हम उन जानकारियों को आपके सामने प्रकट करने की कोशिस करेंगें जिससे शायद आप अनजान हों.

भारत के राष्ट्रीय वृक्ष बरगद के बारे में

राष्ट्रीय वृक्ष बरगद बरगद से जुडी जानकारियां
बरगद का वैज्ञानिक नाम Ficus benghalensis
बरगद का अन्य नाम बट, कहीं कहीं पर वट वृक्ष
बरगद वृक्ष का महत्व पूजनीय, औषधीय गुण से परिपूर्ण, प्राचीन महत्व, अन्य विशेष गुण
बरगद वृक्ष पाया जाता है भारतीय उपमहाद्वीप में
प्रकृति कैसा है स्थलीय प्रकृति
बरगद की उचाई लगभग 25 मीटर
गौरव भारत का राष्ट्रीय वृक्ष होने का (national tree of india)
हिन्दू धर्म में वट वृक्ष भगवान शिव के सामान माना जाता है

बरगद वृक्ष क्या है – What is a banyan tree

बरगद जिसे वट वृक्ष भी कहा जाता है. लगभग पुरे भारत वर्ष में पाया जाता है यह दुनिया के विशाल वृक्षों में से एक है. गांव के चौंक चौराहों में लगभग सभी ने इस वृक्ष को देखा होगा. बरगद वृक्ष चूँकि इतना विशाल होता है यह कई सारे जीव-जंतुओं का निवास स्थान होता है जैसे – कई प्रकार के कीड़े-मकोड़े और पक्षियां.

बरगद एक विशालकाय वृक्ष है जो औषधीय गुणों के साथ-साथ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक खास वृक्ष है यह पुरे भारत में पाया जाता है. तथा इसका वैज्ञानिक नाम फिकस बेंगलेंसिस हैं.

बरगद की शाखाओं से भी जड़ें निकलती है. जो जमीन की तरफ झुकी हुई होती है धीरे-धीरे यह जड़ें जमीन से आकर जुड़ जाती है. जो बरगद के वृक्ष को जड़ों के मामले में और मजबूती प्रदान करती है.

बरगद की पत्तियां छोटी अण्डाकार साइज की होती है इसकी लम्बाई 10 से 20 सेंटीमीटर तथा चौड़ाई 8 से 15 सेंटीमीटर की होती है.

बरगद

बरगद वृक्ष की वंश वृद्धि कैसे होती है

बरगद के वृक्ष की वंश वृद्धि छोटे पक्षियों के माध्यम से होता है जो इसके फलों को निगल लेते हैं तथा बीज के रूप में इसे बाहर निकालते हैं. सुरुवात में इसे वृद्धि के लिए नमी की आवश्यकता होती है परन्तु एक बार पौधा रोपण हो जाने के पश्चात यह कहीं भी अपना पोषण कर लेता है और समय के साथ एक विशालकाय वृक्ष के रूप में परिवर्तित होता है.

बरगद वृक्ष की विशेषता – Feature of banyan tree

बरगद वृक्ष (banyan tree) जितना विशाल ऊपरी भाग से दिखाई देता है उतना ही विशाल अंदर से अर्थात जड़ों की लम्बाई और घेराव भी विशाल रूप से विस्तृत होता है.

वट वृक्ष घने पत्तेदार वाला पेड़ है जिसके छाव गांव के लोग बैठकर अपना समय व्यतीत करते हैं तथा बैठक पंचायत या अन्य कार्यो के लिए इसे उपयुक्त मानते हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में बरगद वृक्ष का छाया अपार आनद का अनुभूति कराता है.

गांव में रहने वाले बच्चे इसी बरगद वृक्ष के नीचे अपने सभी प्रकार के खेल जैसे – कबड्डी, खो-खो, रेस, क्रिकेट इत्यादि खेला करते हैं. बरगद का वृक्ष जितना विशाल प्रतीत होता है. उनमे लगने वाले फल का आकर उतना ही छोटा होता है.

बरगद का फल भी कई तरह से उपयोगी होता है यह छोटा लाल रंग का होता है. खासकर जानवरों जैसे बकरी के चारे लिए यह यह एक पौष्टिक आहार है. अपने बचपन के दिनों में गांव के अनेक बच्चों ने इसका स्वाद चखा है.

बरगद वृक्ष का हिन्दू धर्म में मान्यता

हिन्दू धर्म के अनुसार वट वृक्ष एक खास वृक्ष है चाहे मंदिरों का निर्माण हो या शादीसुदा महिलाओं द्वारा अपने पति की लम्बी उम्र के लिए कामना वट वृक्ष के पूजन और आशीर्वाद से ही किया जाता है.

चुकी बरगद का वृक्ष लम्बे समय के लिए जीवित रहता है इसलिए महिलाए वट सावित्री का उपवास रखती हैं. तथा अपनी पति की लम्बी उम्र की कामना के लिए वट वृक्ष (बरगद) का पूजा करती हैं.

साथ ही जिस प्रकार हिंदी धर्म में ब्रह्मा, विष्णु, महेश (महेश = शंकर जी) को त्रिमूर्ति माना जाता है ठीक उसी प्रकार वृक्षों में पीपल, नीम व वट वृक्ष को त्रिमूर्ति स्वरुप माना जाता है. जिसमे वट वृक्ष शंकर जी का घोतक है.

बौद्ध धर्म के अनुसार वट वृक्ष की मान्यता

बौद्ध धर्म की मान्यता के अनुसार गौतम बुद्ध को बरगद वृक्ष के नीचे ही ज्ञान (बोधि) की प्राप्ति हुई थी, इसलिए बरगद वृक्ष को बोधि वृक्ष भी कहा जाता है. बरगद वृक्ष अपूर्व शांति व सुकून देने वाला वृक्ष है इस वृक्ष ने नीचे सभी प्रकार के कार्यों जैसे – शादी इत्यादि को सुभ माना जाता है.

बरगद के विभिन्न फायदे

बालों की समस्या के लिए फायदेमंद है बरगद का पेंड

बरगद के पत्तों का भष्म बनाकर अलसी के तेल में मिलाकर लगाने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है. बालों में कालापन और चमक बरक़रार रखने के लिए तथा रुसी जैसी समस्याओं के लिए बरगद फायदेमंद है.

बरगद का फल और इसके फायदे

यह पूरी तरह पौष्टिकता से भरा होता है अतः इसका सेवन शरीर के लिए फायदेमंद है. इसके साथ ही जलन और सूजन के लिए यह फायदेमद है.

बरगद के छाल एवं पत्तियों का उपयोग

बरगद के छाल व पत्तियों के उपयोग से रक्तस्त्राव जैसी समस्याए ठीक होती है. पेचिस और दस्त जैसी समस्याओं में भी बरगद का छाल फायदेमंद है.

बरगद को भारत का राष्ट्रीय वृक्ष के रूप में क्यों अपनाया गया

National tree of india in hindi के रूप में बरगद को इसलिए लिया गया क्योंकि यह अपने विशालकाय शाखा और लम्बे समय तक जीवन के वजह से अमरता का प्रतिक है. भारत देश की एकता को इसके जड़ से आँका जा सकता है.

जो लगातार विस्तृत होकर वृक्ष को मजबूती प्रदान करता है. यह सभी प्रकार के जीव जंतुओं को आश्रय देता है जो यह दर्शाता है कि भारत विविध धर्मों के साथ अनेकता में एकता वाला देश है.

बरगद वृक्ष का एक नाम कल्प तरु भी है जिसका अर्थ होता है. इक्षा की पूर्ति करने वाला – वट वृक्ष सभी प्रकार की इक्षाओं और जरूरतों को पूरा करता है जिस प्रकार हमारा देश “भारत” हमारी इक्षाओं को पूरा करता है.

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